नए लोगों के लिए गुलाब की बागवानी – संपूर्ण मार्गदर्शक
गुलाब को सबसे लोकप्रिय और सबसे ज्यादा उगाये जाने वाले सजावटी पौधों के रूप में वर्गीकृत किया गया है। हम उन्हें बालकनी और आंगनों से लेकर दुनिया के सबसे मशहूर राजशाही बगीचों तक, लगभग हर जगह पा सकते हैं। गुलाब, रोज़ा वर्ग का एक सदाबहार पतझड़ी पौधा है (यानी, यह मौसमी रूप से अपनी पत्तियां गिराता है), और रोजेसी कुल का सदस्य है। रोज़ा वर्ग में सैकड़ों प्रजातियां और हज़ारों फसलें शामिल हैं, जिनमें से प्रत्येक की अलग-अलग विशेषताएं होती हैं। इसलिए, हमें झाड़ीदार, चढ़ने वाली, बौनी प्रजातियां, लकड़ी, फूलों, फलों या एसेंशियल ऑइल के लिए उगाई जाने वाली प्रजातियां मिल सकती हैं।
इस पौधे का तना लकड़ी वाला होता है और काँटों से ढंका होता है। ये कांटे नुकीलेदार छाल होते हैं। इस पौधे की पत्तियां एकान्तरिक होती हैं। फूलों के रंग गुलाबी से लाल में होते हैं, हालाँकि आजकल, हम सफेद, पीला, गुलाबी, लाल और यहाँ तक कि काले रंग जैसे विभिन्न रंगों में इसकी फसलें देख सकते हैं।
गुलाब को मुख्य रूप से इसके फूलों के लिए उगाया जाता है। हालाँकि, कुछ किस्मों को लकड़ी के लिए भी उगाया जाता है, जो शानदार गुणवत्ता वाली होती हैं और उन्हें अक्सर कार के इंटीरियर और गन उद्योग में प्रयोग किया जाता है। इस पौधे के फूलों को सजावट के लिए इस्तेमाल किया जाता है लेकिन इसके अन्य प्रयोग भी हैं। इसके फूलों की पंखुड़ियों में बहुत उत्तम दर्ज़े का एसेंशियल ऑइल होता है, जिसका प्रयोग मुख्य रूप से सौंदर्य प्रसाधन उद्योग में किया जाता है। इसके अलावा, कुछ फसलों की पंखुड़ियों का प्रयोग मिठाई और मुरब्बा बनाने के लिए भी होता है।
घर पर गुलाब कैसे उगाएं
रंगीन फूलों से भरे हुए बगीचे या बालकनी से ज्यादा सुंदर और कुछ नहीं हो सकता। घर के बगीचे के लिए गुलाब बहुत अच्छा विकल्प है। इन्हें आसानी से उगाया जा सकता है, ये पौधे किसी भी परिस्थिति में खुद को आसानी से ढाल लेते हैं, और वनस्पति जगत के कुछ सबसे सुंदर फूल उत्पन्न करते हैं। हालाँकि, अपने बगीचे में पौधे उगाने के कुछ जोखिम, और नियम होते हैं, और ऐसी भी कुछ चीजें होती हैं जिनसे आपको बचना पड़ता है।
मुख्य सारांश बिंदु:
गुलाब की पुरानी किस्में 40-50 साल या उससे ज्यादा समय तक जीवित रह सकती हैं, लेकिन नर्सरी में बेची जाने वाली आधुनिक किस्में आमतौर पर 10-12 साल जीवित रहती हैं।
किसी अच्छी नर्सरी से छोटा पौधा (केवल जड़ों के साथ या किसी गमले में लगा हुआ) खरीदना गुलाब लगाना शुरू करने का सबसे अच्छा तरीका है। बीज से गुलाब लगाने की सलाह नहीं दी जाती।
अगर आप केवल जड़ों वाला पौधा खरीदते हैं तो उत्पादक के दिशानिर्देश के अनुसार आपको इसे लगाने से पहले रात भर भिगोकर रखना पड़ सकता है।
अपने बगीचे में पौधा लगाने से पहले, मिट्टी की गुड़ाई करने की ज़रूरत होती है ताकि कोई भी घासफूस हटाई जा सके और नए पौधे के लिए मिट्टी को तैयार किया जा सके।
कई क्षेत्रों में, आप साल भर गुलाब का पौधा लगा सकते हैं, लेकिन पतझड़ के अंत से लेकर वसंत की शुरुआत तक इसे लगाना सबसे अच्छा होता है ताकि गर्मियों के अंत समय तक आप अपने गुलाब को खिलता हुआ देख सकें।
आपको एक बड़ा गड्ढा करके धीरे-धीरे मिट्टी के गोले के साथ छोटे पौधे को उसी गहराई में इसे लगाना होगा जितनी गहराई में यह नर्सरी में था।
अगर आप गमले में गुलाब लगाना चाहते हैं तो आपको प्लास्टिक के गमले से बचना चाहिए और मिट्टी या सीमेंट का गमला इस्तेमाल करना चाहिए। इस बात का ध्यान रखें कि आपको हर दो साल पर अपने गुलाब को नए और ज्यादा बड़े गमले में लगाना पड़ सकता है।
आप किसी वैध विक्रेता से गुलाब के लिए पोषक तत्वों से भरपूर विशेष मिट्टी का मिश्रण खरीदने के बारे में भी सोच सकते हैं। उचित वायु संचार और जल निकासी की व्यवस्था के लिए आप मिट्टी में पर्लाइट मिला सकते हैं।
अगर आपने चढ़ने वाली गुलाब की लताओं का चुनाव किया है, तो परगोला जैसे सहारे की ज़रूरत पड़ती है।
सुंदर फूल खिलाने के लिए गुलाब को पानी की ज़रूरत पड़ती है। उनकी नियमित रूप से सिंचाई करें, विशेष रूप से गर्मियों के दौरान, क्योंकि इस दौरान ज्यादातर मामलों में हफ्ते में एक या दो बार सिंचाई की ज़रूरत पड़ती है।
जहाँ तक उर्वरीकरण की विधि की बात है, आपको प्रति वर्ष एक से दो बार गोबर की खाद या कम्पोस्ट डालने की आवश्यकता हो सकती है। आप किसी संतुलित खाद (N-P-K-10-10-10) या धीमी गति से निकलने वाली खाद (4 महीने) का चुनाव भी कर सकते हैं, जिसे अक्सर वसंत की शुरुआत में डाला जाता है।
गुलाब को छंटाई की ज़रूरत पड़ती है। नहीं तो यह बहुत ज्यादा बड़ा, लकड़ियों वाला और बीमारियों के लिए संवेदनशील हो सकता है। आपको हर साल कमजोर, रोगग्रस्त, या पुरानी डंठलों को हटाना पड़ेगा। असल में, पौधों का प्रशिक्षण और छंटाई बहुत ज़रूरी है क्योंकि, पौधों की उचित आकृति बनाये रखने के अलावा, बेहतर वायु संचार और धूप का प्रवेश आसान बनाने के कारण, ये पौधों के सामान्य स्वास्थ्य को भी अच्छा बनाते हैं। ज्यादातर मामलों में, इसकी छंटाई अंतिम पाले के बाद, वसंत की शुरुआत में होती है। हालाँकि, वसंत, गर्मी और पतझड़ के दौरान आपको मामूली छंटाई करने की आवश्यकता हो सकती है (विशेष रूप से, लता वाले गुलाबों की)।
अगर आप फूल की कटाई करना चाहते हैं तो आपको इसे कैंची से 45 डिग्री के कोण पर काटना पड़ता है। आप फूल के तने को उसकी पिछली पत्ती के ठीक ऊपर से काट सकते हैं ताकि पौधा जल्द ही दूसरा फूल उत्पन्न कर सके।
कांटों के कारण गुलाब की देखभाल करना थोड़ा खतरनाक हो सकता है। चूँकि, आपने अपने बगीचे में गुलाब उगाने का फैसला किया है, इसलिए आप विशेष दस्ताने खरीदने पर विचार कर सकते हैं जो नियमित गतिवधियों के दौरान आपकी रक्षा करेंगे।
गुलाब की स्थिति, मिट्टी की ज़रूरतें और तैयारी
ज्यादातर लोग 1 या 2 साल पुरानी गुलाब की कटिंग से इसे उगाना शुरू करते हैं। इसकी रोपाई से कुछ दिन पहले, वो खेत तैयार करते हैं। वो खेत की जुताई करते हैं, पहले से मौजूद अवशेषों और घासफूस को हटाते हैं। वो मिट्टी में अच्छी तरह से सड़ी हुई गोबर की खाद के साथ बुनियादी उर्वरीकरण भी मिला सकते हैं। अगर वो कई गुलाब लगाने का फैसला करते हैं तो वो सिंचाई प्रणाली भी डिज़ाइन और निर्मित कर सकते हैं।
रोपाई के लिए तैयार होने पर, वे 30-40 सेमी (11.8-15.7 इंच) की गहराई के गड्ढे खोदते हैं और छोटे गुलाब लगाते हैं। जहाँ तक स्थिति का सवाल है, आपको अपने बगीचे में एक धूप वाले स्थान का चयन करना होगा। गुलाब केवल उसी जगह सुंदर फूल उत्पन्न कर सकता है, जहाँ उसे कई घंटों तक सीधी धूप मिलती है। जहाँ तक मिट्टी संबंधी ज़रूरतों की बात है, गुलाब के फूल को पनपने के लिए गहरी, चिकनी बलुई मिट्टी, लेकिन अच्छी जल निकासी व्यवस्था की ज़रूरत होती है। मिट्टी के उपयुक्त पीएच स्तर के संबंध में, यह जग-जाहिर है कि गुलाब को थोड़ी अम्लीय मिट्टी (5.5 से 7 पीएच तक) पसंद होती है।
गुलाब लगाने से पहले, मिट्टी की अच्छी तरह से जुताई होनी चाहिए। इस जुताई से बाहरमासी उगने वाली घासफूस का नाश होता है और मिट्टी में भुरभुरापन आता है, जो जड़ की विकास के लिए बहुत ज़रूरी है। पौधे लगाने से कुछ दिन पहले, कई किसान पूरे खेत में या केवल रोपाई वाले स्थानों पर अच्छी तरह से सड़ी हुई गोबर की खाद जैसा कोई रोपाई उर्वरक डालते हैं। वो मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के लिए और मिट्टी की बनावट सुधारने के लिए ऐसा करते हैं।
गुलाब लगाना: ग्राफ्टेड और अपनी जड़ वाले गुलाब
गुलाब के पौधे मुख्य रूप से मजबूत लकड़ी वाले सादे या ग्राफ्टेड कटिंग से लगाए जाते हैं। ग्राफ्टिंग आमतौर पर इस्तेमाल की जाने वाली एक तकनीक है जिसमें हम दो अलग-अलग पौधों के हिस्सों को एक साथ जोड़ देते हैं ताकि वे एक साथ एक ही पौधे के रूप में विकसित हो सकें। पहले पौधे के ऊपरी हिस्से को साइअन कहा जाता है जो दूसरे पौधे की जड़ प्रणाली पर बढ़ता है, जिसे रूटस्टॉक कहा जाता है। अंत में, हमारे पास एक ऐसा पौधा होता है, जो अपने विभिन्न घटकों के सभी लाभों को आपस में जोड़ता है। आजकल, सबसे ज्यादा प्रयोग किया जाने वाला रूटस्टॉक जंगली गुलाब की प्रजातियां हैं। कई मामलों में, अपनी जड़ वाले गुलाब की तुलना में ग्राफ्टेड गुलाब ठंड के लिए ज्यादा संवेदनशील होते हैं। आप अपनी स्थानीय नर्सरी से परामर्श करके यह पता लगा सकते हैं कि आपके क्षेत्र की जलवायु के लिए कौन सा विकल्प सबसे अच्छा होगा।
हालाँकि, गुलाब को अन्य तरीकों से भी उगाया जा सकता है। बीज केवल प्रयोगशालाओं में पसंद किए जाते हैं। बहुत छोटे पैमाने पर, अंकुर और रनर भी प्रयोग किए जाते हैं।
गुलाब की रोपाई – गुलाब की रोपाई कैसे करें
रोपाई के समय तक, उत्पादक 30-40 सेमी (11.8-15.7 इंच) की औसत गहराई के गड्ढे बनाते हैं और छोटे पौधे लगा देते हैं। पौधा लगाने से पहले, कई मामलों में, उत्पादक कटिंग की जड़ों को छांट देते हैं और ऐसी डंठलों को हटा देते हैं जो साइअन से निकली होती हैं। पौधों को इतनी गहराई में लगाया जाता है कि ग्राफ्टेड क्षेत्र मिट्टी की सतह से 4-5 सेमी (1.5-2.3 इंच) ऊपर हो। मिट्टी डालते समय, गड्ढा पूरा भरने तक हमें इसे धीरे-धीरे दबाते रहना होगा, ताकि नयी और संवेदनशील जड़ प्रणाली को कोई नुकसान न पहुंचे। कुछ उत्पादक रोपाई से पहले जड़ों में कवकनाशी भी लगा देते हैं (अपने क्षेत्र के स्थानीय लाइसेंस प्राप्त कृषि विज्ञानी से पूछें)।
गुलाब की छंटाई कैसे करें
स्वस्थ गुलाब उगाने के लिए छंटाई सबसे ज्यादा ज़रूरी कारकों में से एक है, जो आने वाले सालों के लिए कई फूल उत्पन्न करने में मदद करेगा। छंटाई से ज्यादा फूल खिलते हैं, पौधे मजबूत होते हैं, और बीमारी के प्रकोप से सुरक्षा होती है। अगर, गुलाब को एक या उससे ज्यादा साल तक नहीं छांटा जाता तो उसका तना बहुत मोटा हो जायेगा, और फूलों के खिलने में भी बहुत कमी आएगी।
पौधा लगाने के पहले साल से ही पौधों की छंटाई शुरू हो जाती है। उत्पादक 45-60 सेंटीमीटर की ऊंचाई पर छंटाई करना शुरू करते हैं ताकि परिधीय डंठल के विकास को बढ़ावा दिया जा सके, जिसकी वजह से अंत में झाड़ियों का विकास होता है।
रोपाई के बाद पहली गर्मी से, उत्पादक कोई भी निकले हुए फूल साथ ही साथ कमजोर डंठलें हटाना शुरू करते हैं, ताकि आने वाले पतझड़ में उत्पादन बढ़ाया जा सके। दूसरे साल से, फूलों की कटाई के समय के दौरान ही हल्की छंटाई की जाती है। इस समय के दौरान, उत्पादक ज़मीन से पहली पत्ती के ऊपर के डंठलों को काटकर, पहले फूल के नीचे से उन्हें हटा देते हैं। हर 2-3 साल में, उत्पादक पुरानी, टूटी हुई, कमजोर या रोगग्रस्त शाखाओं और छोटी टहनियों को हटाकर ज्यादा छंटाई कर सकते हैं ताकि पौधे को मजबूत किया जा सके।
पौधे को पतला करना भी एक महत्वपूर्ण तकनीक है, जिसके अनुसार बागवान अपने हाथ से छोटे, अविकसित टेढ़े-मेढ़े, या खराब फूलों को पौधों से हटा देते हैं। इस तरह, हम पौधे को अपने पोषक तत्व कम लेकिन ज्यादा अच्छे फूलों को भेजने के लिए प्रेरित करते हैं।
गुलाब की पानी संबंधी ज़रूरतें – गुलाब की सिंचाई कैसे करें
सिंचाई सबसे महत्वपूर्ण गतिविधियों में से एक है और गुलाब की खेती की सफलता के लिए बहुत ज़रूरी है। बहुत सारे फूल उत्पन्न करने के लिए गुलाब को पानी की ज़रूरत होती है। खिलने के चरणों के दौरान गुलाब के पौधे को ज्यादा पानी देना पड़ता है, जो गर्मियों से लेकर पतझड़ तक होता है। बड़े व्यावसायिक गुलाब के बगीचों में, अक्सर ड्रिप सिंचाई प्रणालियों का प्रयोग किया जाता है। इन प्रणालियों के साथ, किसान हर दिन सही मिट्टी की नमी का निरीक्षण कर सकता है और उचित फर्टिगेशन, यानी सिंचाई प्रणाली के अंदर पानी में घुलनशील खादों का समावेश कर सकता है। अलग-अलग परिस्थितियों में पानी की ज़रूरतें अलग-अलग हो सकती हैं। अलग-अलग किस्मों के लिए भी पानी की ज़रूरतें अलग-अलग होती हैं।
गुलाब की उर्वरक संबंधी ज़रूरतें
कोई भी उर्वरीकरण विधि लागू करने से पहले, आपको अर्द्धवार्षिक या वार्षिक मिट्टी के परीक्षण से अपने खेत की मिट्टी की स्थिति पर विचार करना चाहिए। कोई भी दो खेत एक जैसे नहीं होते, और न ही कोई आपकी मिट्टी का परीक्षण डेटा, ऊतक विश्लेषण, और आपके खेत का फसल इतिहास देखे बिना आपको उर्वरीकरण विधियों का सुझाव दे सकता है।
सैद्धांतिक रूप से, हम जानते हैं कि गुलाब को सभी तीन मूलभूत तत्वों (N-P-K) की ज़रूरत होती है, ताकि यह मजबूत जड़ें, पत्तियां, और फूल विकसित कर सके। इसलिए, कई मामलों में, N-P-K 10-10-10 का एक संतुलित उर्वरक प्रयोग किया जाता है। पौधा लगाते समय गड्ढे के अंदर नाइट्रोजन उर्वरक डालने से बचें, नहीं तो आप अपने छोटे गुलाब की जड़ें खराब कर देंगे। कई बागवान धीमी गति से निकलने वाले उर्वरक (4-6 महीने) प्रयोग करते हैं, जिन्हें आमतौर पर वसंत में डाला जाता है। अन्य बागवान मिक्सर में 4-5 केले के छिलके डालकर उन्हें पीस लेते हैं। इसके बाद, वो इसमें पानी मिलाकर घर में बना तरल उर्वरक मिश्रण तैयार करते हैं, जो छोटे पौधों को पोटैशियम प्रदान करता है।
हालाँकि, ये बस कुछ सामान्य कार्यप्रणालियां हैं जिनका पालन अपना खुद का शोध किये बिना नहीं किया जाना चाहिए। हर खेत अलग होता है और इसकी ज़रूरतें भी अलग होती हैं। कोई भी उर्वरीकरण विधि लागू करने से पहले मिट्टी के पोषक तत्वों और पीएच की जांच करना बहुत ज़रूरी है। पोषक तत्वों की कमी का पता लगाने और इसे सही करने के लिए पत्ती का विश्लेषण भी बहुत महत्वपूर्ण हो सकता है।
गुलाब की कटाई
गुलाब की कटाई का सही समय मुख्य रूप से इसकी किस्म पर निर्भर करता है। ज्यादातर मामलों में, फूलों को जल्दी ही काट लिया जाता है, जब वो अभी भी कलियों के रूप में होते हैं; हालाँकि कुछ किस्मों में, बागवान उनके खिलना शुरू होने तक का इंतज़ार करते हैं। इसे विशेष कैंची का इस्तेमाल करके, बिल्कुल सुबह या देर शाम को काटा जाता है। फूल वाली डंठल निकलने वाले स्थान से नापकर ठीक पहली पत्ती के ऊपर से कैंची से फूल वाली डंठल को काटा जाता हैं। अगर बागवान फूल खिलने तक का इंतज़ार करते हैं तो वे इसके निकलने वाले बिंदु से पूरी फूल की डंठल काटते हैं।
गुलाब पर लगने वाले सबसे महत्वपूर्ण कीड़े और बीमारियां
दुर्भाग्य से, गुलाब बहुत सारे फफूंदी रोगों और विभिन्न कीड़ों से ग्रस्त हो सकता है।
कीड़े
एफिड्स
एफिड्स मुख्य रूप से, वसंत के मौसम में छोटी टहनियों और पत्तियों पर दिखाई देते हैं और उन्हें खाते हैं जिसकी वजह से क्लोरोटिक स्पॉट पड़ जाते हैं। पौधे पर एफिड्स लगने के बाद, इसका प्रबंधन ज्यादा मुश्किल हो जाता है। कीटनाशकों के विरुद्ध आसानी से प्रतिरक्षा विकसित करने के कारण, जैविक प्रबंधन के माध्यम से उन्हें नियंत्रित करना सबसे अच्छा होता है। रासायनिक उपचार का प्रयोग केवल तभी किया जाना चाहिए जब समस्या बहुत गंभीर होती है और आपको यह हमेशा स्थानीय लाइसेंस प्राप्त कृषि विज्ञानी के निरीक्षण में ही करना चाहिए।
टेट्रानाइकस
यह घुन गुलाब का सबसे आम दुश्मन है। यह कीड़ा मुख्य रूप से पत्तियों के पीछे रहता है, जहाँ यह पौधे का रस चूसकर जीवित रहता है। इसके गुलाब पर हमला करने के बाद, हमें पौधे पर पीली, सूखी, जली हुई पत्तियों के लक्षण दिखाई देते हैं। फसल पर हमला करने के बाद, इसे संभालना ज्यादा मुश्किल हो जाता है। कीटनाशकों के विरुद्ध आसानी से प्रतिरक्षा विकसित करने के कारण, जैविक प्रबंधन के माध्यम से उन्हें नियंत्रित करना सबसे अच्छा होता है। रासायनिक उपचार का प्रयोग केवल तभी किया जाना चाहिए जब समस्या बहुत गंभीर होती है और आपको यह हमेशा स्थानीय लाइसेंस प्राप्त कृषि विज्ञानी के निरीक्षण में ही करना चाहिए।
बीमारियां
काला धब्बा
डिप्लोकार्पोन रोजी फफूंदी की वजह से काले धब्बे पड़ते हैं और यह गुलाब के सबसे आम रोगों में से एक है। इस बीमारी के लक्षणों के रूप में हमें पत्तियों और छोटे तनों पर अनियमित काले धब्बे दिखाई देते हैं। धीरे-धीरे संक्रमित पत्तियां पीली होकर गिरना शुरू हो जाती हैं। अच्छी पत्तियों के बिना, पौधा प्रकाश संश्लेषण नहीं कर पाता और सूख जाता है। बीमारी पर नियंत्रण उचित सावधानी के उपायों के साथ शुरू होता है। इसमें खरपतवार पर नियंत्रण और पौधों के बीच सुरक्षित दूरियां, उचित जल निकासी की व्यवस्था, और पत्तियों पर पानी डालने से बचना शामिल है। सूखे हुए फलों को खेत से हटा देना चाहिए। पौधों की सामान्य स्थिति भी उनकी प्रतिरक्षा क्षमता बढ़ा सकती है। समस्या ज्यादा गंभीर होने पर रासायनिक उपचार (कॉपर-आधारित कवकनाशी) का प्रयोग किया जा सकता है और यह हमेशा स्थानीय लाइसेंस प्राप्त कृषि विज्ञानी के निरीक्षण में ही किया जाना चाहिए। उचित साफ-सफाई का ध्यान रखना भी बहुत ज़रूरी है, जैसे हर बार पौधों के संपर्क में लाने से पहले उपकरणों को कीटाणुरोधित किया जाना चाहिए।
पाउडरी फफूंदी
यह बीमारी स्पैरोथेका पैनोसा वर. रोजी फफूंदी के कारण होती है। प्रभावित पौधों पर, हमें पत्तियों, तने, और कलियों पर क्लोरोटिक स्पॉट दिखाई पड़ते हैं। बीमारी पर नियंत्रण उचित सावधानी के उपायों के साथ शुरू होता है। इसमें खरपतवार पर नियंत्रण और पौधों के बीच सुरक्षित दूरियां, उचित जल निकासी की व्यवस्था, और पत्तियों पर पानी डालने से बचना शामिल है। सूखे हुए फूलों को खेत से हटा देना चाहिए।
पौधों की सामान्य स्थिति (पोषक तत्व और पानी का स्तर, धूप) भी उनकी प्रतिरक्षा क्षमता बढ़ा सकती है। समस्या ज्यादा गंभीर होने पर रासायनिक उपचार का प्रयोग किया जा सकता है और यह हमेशा स्थानीय लाइसेंस प्राप्त कृषि विज्ञानी के निरीक्षण में ही किया जाना चाहिए। उचित साफ-सफाई का ध्यान रखना भी बहुत ज़रूरी है, जैसे हर बार पौधों के संपर्क में लाने से पहले उपकरणों को कीटाणुरोधित किया जाना चाहिए। अपने बगीचे में बागवानी करने वाले कई बागवान पाउडरी फफूंदी को नियंत्रित करने के लिए पौधों पर लिक्विड सोप और पानी के साथ बेकिंग सोडा का इस्तेमाल करते हैं। दुर्भाग्य से, बेकिंग सोडा का मिश्रण केवल सावधानी के उपाय के रूप में ही कारगर होता है। इससे पहले से संक्रमित पौधों को बहुत कम फायदा मिलता है।
कोमल फफूंदी
यह बीमारी पेरोनोस्पोरा फेरिनोसा फफूंदी की वजह से होती है, जिसकी वजह से पत्तियों पर विशेष कोणीय और क्लोरोटिक स्पॉट दिखाई पड़ने लगते हैं। अनुकूल आर्द्र परिस्थितियों में, आमतौर पर भूरे रंग की फफूंदी पत्तियों के पीछे दिखाई देती है। पत्तियां पीली पड़ जाती हैं। बीमारी पर नियंत्रण उचित सावधानी के उपायों के साथ शुरू होता है। इसमें खरपतवार पर नियंत्रण और पौधों के बीच सुरक्षित दूरियां, उचित जल निकासी की व्यवस्था, और पत्तियों पर पानी डालने से बचना शामिल है। सूखे हुए फलों को खेत से हटा देना चाहिए। पौधों की सामान्य स्थिति भी उनकी प्रतिरक्षा क्षमता बढ़ा सकती है। समस्या ज्यादा गंभीर होने पर रासायनिक उपचार का प्रयोग किया जा सकता है और यह हमेशा स्थानीय लाइसेंस प्राप्त कृषि विज्ञानी के निरीक्षण में ही किया जाना चाहिए। प्रभावित पत्तियों और ऊतकों को तुरंत हटा दिया जाना चाहिए। उचित साफ-सफाई का ध्यान रखना भी बहुत ज़रूरी है, जैसे हर बार पौधों के संपर्क में लाने से पहले उपकरणों को कीटाणुरोधित किया जाना चाहिए। अपने बगीचे में बागवानी करने वाले कई बागवान कोमल फफूंदी को नियंत्रित करने के लिए पौधों पर लिक्विड सोप और पानी के साथ बेकिंग सोडा का इस्तेमाल करते हैं। दुर्भाग्य से, बेकिंग सोडा का मिश्रण केवल सावधानी के उपाय के रूप में ही कारगर होता है। इससे पहले से संक्रमित पौधों को बहुत कम फायदा मिलता है।







