शंकुधारी पेड़ों की देखभाल: लेलैंड, थूजा, गोल्डक्रेस्ट और एरिज़ोना साइप्रस के बारे में सभी ज़रूरी जानकारी

किसी बगीचे के डिज़ाइन में शंकुधारी पेड़ शायद कुछ सबसे लोकप्रिय विकल्पों में से एक होते हैं। अपनी बहुत कम जरूरतों और अलग तरह की पत्तियों की वजह से इन प्रजातियों को सजावटी पेड़ों के रूप में व्यापक तौर पर इस्तेमाल किया जाता है, जो उन्हें किसी जगह की सुंदरता बढ़ाने के लिए बहुत अच्छा विकल्प बनाता है। निजी मेड़ के रूप में काम करना, शंकुधारी पेड़ों का सबसे लोकप्रिय स्वरुप है। यह निजी मेड़ आपके घर को पड़ोसियों की नज़रों से बचाएगा और इस तरह आपकी निजता बढ़ेगी।

सजावटी पेड़ों के रूप में इस्तेमाल होने वाले शंकुधारी पेड़ों के बहुत सारे प्रकार मौजूद हैं। हालाँकि, उनमें से सभी पेड़ हर उद्देश्य के लिए उपयुक्त नहीं होते।

बाज़ार में, हमें मेड़ के लिए हरी पृष्ठभूमि तैयार करने, किसी स्थान की सीमा तय करने या किसी जगह को हवा और धूल से सुरक्षित बनाने के लिए उपयुक्त शंकुधारी पेड़ मिल सकते हैं। कुछ मामलों में, वे ध्वनिक रोधन के लिए भी प्रभावी होते हैं। नीचे हम आमतौर पर प्रयोग किये जाने वाले कुछ ऐसे सदाबहार शंकुधारी पेड़ों के बारे में बताएंगे, जो बगीचों और चौराहों के लिए उपयुक्त होते हैं।

मैं अपने बगीचे में कौन सा शंकुधारी पेड़ लगाऊं? – बागवानी के लिए शंकुधारी पेड़ के उदाहरण

थूजा

यह पौधा निम्नलिखित के लिए उपयुक्त है:

ऊँचे और घने निजी मेड़ बनाने के लिए (जब तक कि हम बौनी किस्में नहीं चुनते)

बगीचे में अलग-अलग लगाने के लिए

गमलों में लगाने के लिए

थूजा की विशेषताएं: थूजा (थूजा ओरिएंटलिस) एक सदाबहार सजावटी शंकुधारी पौधा है। यह कूप्रेसाएसिए कुल का सदस्य है। कई प्रजातियों में, पौधे की ऊंचाई 18 मीटर (59 फीट) तक पहुंच सकती है। हालाँकि, इसकी ज्यादातर किस्में मध्यम ऊंचाई की होती हैं और ज्यादातर झाड़ियों या छोटे पेड़ों के रूप में पायी जाती हैं। विशेष रूप से, थूजा ऑक्सिडेंटलिस (या टी. पिरॅमिडलिस पिरॅमिडल थूजा) और थूजा ओरिएंटलिस सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली थूजा प्रजातियों में से एक हैं। इस पौधे में फूल आते हैं, लेकिन इसके फूल बहुत छोटे होते हैं। शंकुधारी होने के नाते, पौधे के बीज छोटे अंडाकार पीले शंकु के अंदर मौजूद जाते हैं।

मैं अपना थूजा कहाँ लगाऊं

यह पौधा -25 ℃ से +32 ℃ (-13 से 89.6 ℉) तक का तापमान सहन कर सकता है; हालाँकि ज्यादा तापमान पर, इसे समस्या होने लगती है।

जहाँ तक मिट्टी की बात है, इस पौधे की कोई विशेष ज़रूरतें नहीं हैं। यह सभी तरह की मिट्टियों में अच्छे से बढ़ता है, यहाँ तक कि काफी शुष्क मिट्टी में भी। इसे ठन्डे क्षेत्र पसंद हैं, लेकिन यह समुद्र के किनारे भी फल-फूल सकता है।

लेलैंड:

यह एक बहुत लोकप्रिय पौधा है, जो निम्नलिखित के लिए उपयुक्त है:

बगीचे में लगाने के लिए

गमले में लगाने के लिए

अपार्टमेंट में हरियाली के लिए

घने और ऊँचे निजी मेड़ बनाने के लिए

लेलैंड की विशेषताएं:

लेलैंड (कप्रेसोसिपारिस लेलैंडी) सबसे लोकप्रिय सजावटी शंकुधारी पौधों में से एक है। यह तेजी से बढ़ने वाला सदाबहार शंकुधारी है, जिसका ऊपरी सिरा घने पिरामिड के आकार का होता है। बसंत के अंत समय में या गर्मियों की शुरुआत में (मई-जून) इस पौधे में फूल खिलते हैं, हालाँकि, इसके फूल बहुत छोटे होते हैं।

मैं अपना लेलैंड कहाँ लगाऊं

यह पौधा -25 ℃ से +32 ℃ (-13 से 89.6 ℉) तक का तापमान सहन कर सकता है; हालाँकि ज्यादा तापमान पर, इसे समस्या होने लगती है। जहाँ तक मिट्टी की बात है, इस पौधे की कोई विशेष ज़रूरतें नहीं हैं, यह सभी तरह की मिट्टियों में अच्छे से बढ़ता है, यहाँ तक कि ख़राब और सूखी मिट्टी में भी, बशर्ते कि इसमें उचित जल निकासी की व्यवस्था हो।

गोल्डक्रेस्ट  

यह पौधा निम्नलिखित के लिए उपयुक्त है:

बगीचे में लगाने के लिए

मेड़ बनाने के लिए (गोपनीयता मेड़)

गमलों में लगाने के लिए

गोल्डक्रेस्ट (कप्रेसस मैक्रोकर्पा गोल्डक्रेस्ट) कप्रेसस सायप्रस कुल का एक अन्य सदाबहार शंकुधारी पेड़ है। इस पौधे की पत्तियों में नींबू की ख़ुश्बू होती है। कई देशों में यह अक्सर सबसे ज्यादा पसंद किया जाने वाला सजावटी पेड़ होता है, क्योंकि इसकी पत्तियां बहुत सुन्दर होती हैं। बसंत ऋतु के अंत समय के दौरान इसमें फूल भी खिलते हैं, लेकिन इसके फूल बहुत छोटे होते हैं। इसकी किस्म, उगाने के लिए प्रयोग किये गए क्षेत्र और पेड़ की देखभाल के आधार पर, इसकी ऊंचाई 12-15 मीटर (39.3-49.2 फीट) तक जा सकती है।

मैं अपना गोल्डक्रेस्ट कहाँ लगाऊं

इसे गर्म क्षेत्रों में लगाने की सलाह नहीं दी जाती, क्योंकि बहुत ज्यादा तापमान पर इसे परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

एरिज़ोनिका या एरिज़ोना

यह पौधा निम्नलिखित के लिए उपयुक्त है:

बगीचे में लगाने के लिए

मेड़ (निजी मेड़) बनाने के लिए

हवा से सुरक्षा के लिए

एरिज़ोना (कप्रेसस एरिज़ोनिका) मूल रूप से अमेरिका में पाया जाने वाला शंकुधारी सदाबहार पेड़ है, जिसे तेजी से बढ़ने के लिए जाना जाता है। इसका आकार पतले शंकु जैसा होता है और इसकी ऊंचाई 10-15 मीटर (32.8-49.2 फीट) या उससे ज्यादा तक जा सकती है। यह सबसे अनुकूल पौधों में से एक है और इसे बड़े पैमाने पर ऊंचे मेड़ बनाने के लिए और हवा रोकने के लिए प्रयोग किया जाता है, क्योंकि इसकी घनी पत्तियां हवा को काफी ज्यादा रोक सकती हैं।

मैं अपना एरिज़ोना कहाँ लगाऊं

यह पौधा -25 ℃ से +32 ℃ (-13 से 89.6 ℉) तक का तापमान सहन कर सकता है; हालाँकि ज्यादा तापमान पर, इसे समस्या होने लगती है। जहाँ तक मिट्टी की बात है, इस पौधे की कोई विशेष ज़रूरतें नहीं हैं, यह सभी तरह की मिट्टियों में अच्छे से बढ़ता है, यहाँ तक कि ख़राब और सूखी मिट्टी में भी, बशर्ते कि इसमें उचित जल निकासी की व्यवस्था हो।

एरिज़ोना -25 ℃ (-13 ℉) तक का बेहद कम तापमान सहन कर सकता है। गर्मियों में यह उच्च तापमान के लिए भी अच्छी सहनशक्ति दिखाता है, जब तक कि यह 30 ℃ (86 ℉) तक नहीं बढ़ता है। इसकी कोई विशेष मिट्टी संबंधी ज़रूरतें नहीं हैं। यह विभिन्न मिट्टियों में पनप सकता है, यहाँ तक कि बंजर क्षेत्रों में भी, बशर्ते कि इसमें जल निकासी में उचित व्यवस्था हो।

शंकुधारी पेड़ों की विकास दर – विजेता कौन है? – कौन सा शंकुधारी सबसे बड़ा होता है?

बहुत सारे लोग इन पौधों की विकास दर के बारे में पूछते हैं। जवाब यह है कि इसका विजेता निश्चित रूप से लेलैंड है। उचित परिस्थितियों में, लेलैंड लगाने के 1-2 साल बाद ही, यह प्रति वर्ष 120 से 140 सेमी (3.9-4.6 फीट) की दर से बढ़ता है। ऊपर उल्लेखित दूसरी प्रजातियां भी बहुत तेजी से बढ़ती है। उदाहरण के लिए, अनुकूल परिस्थितियों में एरिज़ोना प्रति वर्ष लगभग 100 से 120 सेमी (3.3-3.9 फीट) की ऊंचाई  प्राप्त कर सकता है। गोल्डक्रेस्ट और पिरामिड थूजा भी प्रति वर्ष 60 सेमी की ऊंचाई तक बढ़ सकते हैं। हालाँकि, पहले साल के दौरान, जब तक शंकुधारी छोटे होते हैं, ये अपनी जड़ें विकसित करने की कोशिश करते हैं। इस समय के दौरान, उनकी ऊंचाई ज्यादा नहीं बढ़ती, जिससे बागवान निराश हो जाते हैं। फिर भी आगे के सालों में, और जैसे-जैसे वो बड़े होते हैं, उनका विकास बहुत अच्छा हो सकता है। यहाँ तक कि थूजा भी प्रति वर्ष 2 मीटर (6,6 फीट) तक बढ़ सकता है, फिर भी, ये दसवें साल के बाद होता है। किसी भी मामले में, अगर हम तुरंत घना मेड़ बनाना चाहते हैं तो हमें बड़े पेड़ (2.20 मीटर या 7.2 फीट या उससे अधिक) खरीदने होंगे, और पेड़ों के बीच कम से कम 1 से 1.2 मीटर (3.3-3.9 फीट) की दूरी रखते हुए, उन्हें किसी भी बाड़े से दूर 1 मीटर (3.3 फीट) की दूरी पर लगाना होगा।

अपने बगीचे में लगे शंकुधारी पेड़ों की देखभाल कैसे करें?

शंकुधारी पौधा लगाने के लिए मिट्टी की तैयारी

बगीचे में पेड़ लगाने से पहले, अक्सर ठीक से मिट्टी तैयार करना बहुत ज़रूरी होता है। इस तैयारी में, आमतौर पर, विशेष उपकरणों के इस्तेमाल से पेड़ लगाने के लिए प्रयोग किये जाने वाले स्थान की अच्छी जुताई करना, और स्थान को साफ करना शामिल होता है। जुताई का उद्देश्य घासफूस (जो पानी और पोषक तत्वों में छोटे पेड़ों से मुकाबला करते हैं) और पत्थरों और मिट्टी से किसी भी अनचाही सामग्री को दूर करना होता है। साथ ही, इस तकनीक से, हम मिट्टी को नरम बनाने की भी कोशिश करते हैं, जिससे छोटे पेड़ों की संवेदनशील जड़ों के लिए यह उपयुक्त बन सके।

मिट्टी तैयार करने के बाद, हमें पौधा लगाने के लिए गड्ढा बनाना चाहिए। पेड़ों की प्रजातियों के आधार पर ये गड्ढे अलग-अलग आकार के हो सकते हैं। ज्यादातर मामलों में, हम गमलों में सजावटी शंकुधारी पेड़ खरीदते हैं। इसलिए, एक सामान्य नियम के अनुसार, पौधे के लिए गड्ढे का व्यास 20 से 50 सेमी (7.9-19.7 इंच) होना चाहिए और गहराई गमले के आकार से बड़ी होनी चाहिए।

शंकुधारी पौधे कैसे और कब लगाएं – शंकुधारी पेड़ों के प्रयोग से निजी मेड़ कैसे बनाएं 

ज्यादातर क्षेत्रों में आमतौर पर पतझड़ या सर्दियों की शुरुआत में सजावटी शंकुधारी पेड़ लगाए जाते हैं। आमतौर पर, हम नर्सरी से गमलों में पौधे खरीदकर, अच्छी तरह से मिट्टी तैयार करने के बाद उन्हें सही जगह लगाते हैं। शंकुधारी पौधों को नर्सरी की मिट्टी सहित लगाया जाता है। कई मामलों में, विशेष रूप से अगर हमारी मिट्टी बंजर है तो पेड़ लगाने से पहले गड्ढे की मिट्टी में अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद, कम्पोस्ट या सिंथेटिक खाद मिलाना अच्छा होता है।

इसके बाद, हम पेड़ का तना पकड़ते हैं और गमले को धीरे-धीरे दबाते हैं ताकि यह ज़मीन पर गिर जाए, जिससे हमें मिट्टी का गोला मिलता है। इस प्रक्रिया में विशेष सावधानी रखने की ज़रूरत होती है, क्योंकि पौधे की जड़ें खराब नहीं होनी चाहिए। इसके अलावा, मिट्टी का गोला नहीं टूटना चाहिए। इसी कारण से, हमें पौधे को जबरदस्ती खींचने की कोशिश नहीं करनी चाहिए, और न ही गमले के नीचे उलझी हुई जड़ों को काटना चाहिए। पौधे को लगाते समय इसका तना सीधा होना बहुत ज़रूरी है। कई मामलों में, हमें थोड़े सहारे की ज़रूरत पड़ सकती है, विशेष रूप से, इसे लगाने के बाद शुरुआती चरणों के दौरान। इसी वजह से, हम सहारा देने के लिए पेड़ के तने के बगल में एक छड़ी लगा देते हैं और दो-तीन जगहों पर पेड़ को इससे बाँध देते हैं।

अगर हम एक ही क्षेत्र में एक से अधिक शंकुधारी पौधे लगाना चाहते हैं, तो हमें उनके बीच उचित दूरी बनाकर रखनी चाहिए। शंकुधारी पेड़ की प्रजातियों, जलवायु परिस्थितियों और क्षेत्र की मिट्टी के आधार पर इनके बीच की दूरी अलग-अलग हो सकती है। जाहिर तौर पर, पेड़ लगाने का हमारा उद्देश्य और इसका आकार भी बहुत महत्वपूर्ण है। आमतौर पर, इनके बीच की उचित दूरी उतनी ही होती है, जितनी दूरी पर हमें प्रकृति में पेड़ दिखाई देते हैं। इसलिए अगर हम दो शंकुधारी पौधे लगाना चाहते हैं, उन्हें कम से कम 2-3 मीटर (6.5-9.8 फीट) की दूरी पर लगाना अच्छा होता है, ताकि वे ठीक से बढ़ सकें।

हालाँकि, अगर आप निजी मेड़ बनाना चाहते हैं तो चीजें अलग हो सकती हैं। इस मामले में, हमें पेड़ के बढ़ने की दर सहित पेड़ के प्रकार पर भी विचार करना पड़ता है। पेड़ों को बहुत ज्यादा दूरी पर लगाने पर मेड़ की बढ़ने की दर बहुत धीमी होगी, साथ ही पौधे दिखने में बेकार लगेंगे। वहीं दूसरी तरफ, पेड़ों को बिल्कुल पास-पास लगाने पर, उनके बीच बढ़ने की प्रतियोगिता के कारण, उन्हें बढ़ने में परेशानी होगी, क्योंकि इसकी वजह से उचित वायु-संचार नहीं हो पायेगा जिससे शाखाएं सूखने लगेंगी। विभिन्न शंकुधारी पेड़ों के लिए रोपाई के बीच की दूरी के कुछ उदाहरण हैं: हम लेलैंड, एरिज़ोना, और समान विकास दर वाली दूसरी प्रजातियों को निर्धारित बैरियर (जैसे, खेत) से कम से कम 1 मीटर (3.3 फीट) की दूरी रखते हुए लगाते हैं। अगर आप मेड़ के लिए उनका प्रयोग कर रहे हैं तो पौधों के बीच 1 से 1.5 मीटर (3.3-4.9 फीट) की दूरी रखें।

शंकुधारी पेड़ों की सिंचाई – क्या शंकुधारी पेड़ों को सिंचाई की ज़रूरत होती है? शंकुधारी पेड़ों को कितने पानी की ज़रूरत होती है?

शंकुधारी पेड़ जंगलों से आते हैं जहाँ का तापमान काफी कम होता है। इस वजह से, किसी बगीचे में जीवित रहने के लिए, उन्हें नियमित रूप से पानी देने की आवश्यकता होती है, खासकर गर्मियों के दौरान। आमतौर पर, सर्दियों के दौरान जब बारिश ज्यादा होती है, हम पौधों को केवल तभी अलग से पानी देते हैं, जब एक हफ्ते से ज्यादा समय से बारिश नहीं हो रही होती या जब हम ध्यान देखते हैं कि ज़मीन पूरी तरह से सूखी हुई है। दूसरी ओर, गर्मियों में, पानी की आवश्यकताओं में नियमित रूप से वृद्धि होती है। इस समय के दौरान शंकुधारी पेड़ों को हफ्ते में कम से कम 2-3 बार पानी देने की ज़रूरत पड़ती है। बहुत ज्यादा तापमान (लूह के समय) होने पर, हमें पौधों को प्रतिदिन (शाम के समय) पानी देने की ज़रूरत भी पड़ सकती है। बहुत ज्यादा गर्मी के महीनों के दौरान, हमारे शंकुधारी पेड़ों की पत्तियां सूखने लगती हैं, जिससे पता चलता है कि अब उन्हें पानी की ज़रूरत है। हालाँकि, हमें सिंचाई को लेकर बहुत सावधान रहना चाहिए। यह सही है कि गर्मियों के दौरान इस पौधे की पानी संबंधी ज़रुरतों में इजाफा होता है, लेकिन दूसरी तरफ, उन्हें बहुत ज्यादा पानी भी नहीं देना चाहिए। अगर ऐसा होता है तो पौधों के फाइटोफ्थोरा जैसी खतरनाक बीमारी से संक्रमित होने का जोखिम बढ़ जाता है। किसी भी मामले में, आपको पत्तियों पर पानी डालने से बचना चाहिए, क्योंकि इसकी वजह से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। ज्यादातर मामलों में, स्वचालित सिंचाई प्रणाली स्थापित करना सबसे अच्छी विधि है। हालाँकि, ज्यादातर बगीचों में, हम सिंचाई विधि के रूप में स्प्रिंकलर का प्रयोग करते हैं, लेकिन ड्रिप सिंचाई प्रणाली का प्रयोग करने में ज्यादा समझदारी होती है। इससे पानी बचाने में और पेड़ों की उचित सिंचाई करने में बहुत मदद मिलती है, इसके अलावा शंकुधारी पेड़ों के लिए, यह एक महत्वपूर्ण लाभ भी प्रदान करता है। इससे पत्तियां पानी के संपर्क में आने से बचती हैं। यह बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे फफूंदी रोगों का जोखिम काफी कम होता है।

शंकुधारी पेड़ों की खाद संबंधी ज़रूरतें – शंकुधारी पेड़ों के लिए सबसे अच्छी खाद

आमतौर पर, शंकुधारी प्रजातियां खराब मिट्टी में भी काफी अच्छी तरह से फलती-फूलती हैं। हालाँकि, खाद डालकर उनकी लम्बाई और चौड़ाई बढ़ाने का सुझाव दिया जाता है।

आमतौर पर, बगीचे में लगाए जाने वाले शंकुधारी पेड़ों (लेलैंड, एरिज़ोना, थूजा और गोल्डक्रेस्ट) के लिए सबसे उपयुक्त खाद में फॉस्फोरस और पोटैशियम की तुलना में नाइट्रोजन ज्यादा होता है (जैसे, 18-8-8)। इन प्रजातियों के लिए नाइट्रोजन एक महत्वपूर्ण तत्व है। अन्य प्रकार के खाद भी दिए जा सकते हैं; हालाँकि, इसमें नाइट्रोजन की मात्रा फॉस्फोरस और पोटैशियम के बराबर या उससे अधिक होनी चाहिए। इसके अतिरिक्त, हमारी खाद में सूक्ष्म तत्व (कैल्शियम, मैग्नीशियम, लौह, तांबा, बोरान, मैंगनीज और सल्फर) शामिल हो सकते हैं। आप ऐसा खाद डालने के बारे में भी सोच सकते हैं, जो धीरे-धीरे मिट्टी में जाता है। ऐसे ज्यादातर खाद पानी में घुलनशील खाद के रूप में पाए जाते हैं। शंकुधारी पेड़ों में खाद डालने का सबसे अच्छा समय शुरुआती वसंत (मार्च – अप्रैल) है। शुरुआती वसंत में 6-8 महीने के लिए डाला गया, धीरे-धीरे मिट्टी में शामिल होने वाला खाद, पूरे मौसम में शंकुधारी पेड़ों को सभी पोषक तत्व प्रदान करेगा। हम वसंत में शुरुआत करके, साल में एक या दो बार भी पानी में घुलनशील खाद डाल सकते हैं। गर्मियों के दौरान, धीरे-धीरे निकलने वाली खाद न डालने का सुझाव दिया जाता है, क्योंकि गर्मियों के अंत से लेकर शरद ऋतु (अगस्त से अक्टूबर की शुरुआत) तक पौधा बहुत तेजी से बढ़ सकता है। इसलिए, इसे कठोर (पौधे में ज्यादा ऊतक बनाना) होना पड़ेगा ताकि यह सर्दियों की ठंड सहन कर सके।

हम गोबर की खाद या कम्पोस्ट डालकर भी मिट्टी के पोषक तत्व बढ़ा सकते हैं। जहाँ तक गोबर की खाद की बात है, प्रत्येक बड़े पेड़ के चारों ओर 1 किलो (2.2 पाउंड) गोबर की खाद मिला सकते हैं, लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि गोबर की खाद तने के संपर्क में न आये। वहीं दूसरी ओर, सिंथेटिक जैविक खाद प्रति वर्ग मीटर 200 ग्राम (0.44 पाउंड) की मात्रा में सीधे मिट्टी में डाली जाती है। अगर हमारे शंकुधारी पेड़ गमले में लगे हैं तो हम हर गमले में 1-2 मुट्ठी गोबर की खाद डाल सकते हैं। हालाँकि, ये बस कुछ सामान्य पैटर्न हैं, जिनका पालन अपना खुद का शोध किये बिना नहीं किया जाना चाहिए। हर खेत अलग है और इसकी ज़रूरतें भी अलग हैं। आप अपने स्थानीय लाइसेंस प्राप्त कृषि विज्ञानी से इसपर चर्चा कर सकते हैं।

शंकुधारी पेड़ों की छंटाई – शंकुधारी पेड़ों की छंटाई कब और कैसे करें

हमारे बगीचे के लिए चुने गए कई शंकुधारी पेड़ों को न केवल सौंदर्य संबंधी कारणों (आकार देना) से, बल्कि पेड़ के स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए भी छंटाई की ज़रूरत पड़ती है। हालाँकि, इन प्रजातियों को सजावट के लिए प्रयोग किया जाता है, लेकिन ये कम तापमान वाले जंगलों से आती हैं और ज्यादातर मामलों में बहुत तेज़ी से बढ़ती हैं। अगर हम ऐसे पेड़ों की ज्यादा समय तक छंटाई नहीं करते तो ये बहुत ज्यादा विशाल हो सकते हैं। कई मामलों में, इन पेड़ों की ऊंचाई 30 मीटर (98 फीट) या इससे ज्यादा भी पहुंच सकती है। जाहिर तौर पर, ऐसा होने में कई साल लग सकते हैं, लेकिन शुरुआत में ही इसके विकास को नियंत्रित करने की सलाह दी जाती है। पेड़ के विकास को नियंत्रित करने के अलावा, छंटाई से उचित वायु संचार और पेड़ को नयी ऊर्जा मिलने में भी मदद मिलती है। नयी पत्तियों को बढ़ावा देने के लिए बीमार, अविकसित या सूखी शाखाओं को हटा दिया जाना चाहिए। इसके अलावा, शंकुधारी पेड़ों की छंटाई न करने पर, पत्तियां पतली होने की वजह से पत्तियों के बीच में दूरी आने लगती है। खास तौर पर अगर, पौधों को प्राकृतिक या निजी मेड़ों के रूप में प्रयोग किया जाता है तो यह हमारे लिए अनचाही चीज होती है।

हम साधारण छंटाई कैंची या इलेक्ट्रिक ब्रश कटर का प्रयोग करके, विकास के शुरुआती चरणों से ही अधिकांश शंकुधारी पेड़ों को आसानी से आकार दे सकते हैं। हालाँकि, बड़े और ऊंचे पेड़ों के मामले में, आमतौर पर, टेलीस्कोपिक चेनसॉ का प्रयोग किया जाता है। चेनसॉ जमीन से ही लंबी शाखाओं को काटने की अनुमति देता है। चूँकि, हम फलों के पेड़ों के बारे में बात नहीं कर रहे हैं, जिसमें हम फल लगने की एक मनचाही दर बनाये रखना चाहते हैं, इसलिए यहाँ छंटाई बहुत आसान है। असल में, हम पेड़ों की शाखाओं की लंबाई को कम करके पेड़ के आकार और आकृति को समायोजित करते हैं।

शंकुधारी पेड़ों को पतझड़ के अंत से लेकर वसंत की शुरुआत तक छांटा जा सकता है। उनकी आकृति को बेहतर बनाने के लिए हमें दोबारा गर्मियों के दौरान उन्हें छांटना पड़ सकता है, ताकि उन्हें सर्दियों के लिए तैयार किया जा सके। बहुत ज्यादा गर्मी के दौरान शंकुधारी पेड़ों की छंटाई करना ठीक नहीं होता क्योंकि इसकी वजह से समस्या हो सकती है।

जहाँ तक छंटाई के तरीकों और आकृतियों की बात है, ये शंकुधारी पेड़ों के प्रकार, इसे लगाने के कारण और इसके मालिक की राय के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, बगीचे में लगे अलग-अलग शंकुधारी पेड़ों के लिए, ज़मीन से 20-30 सेंटीमीटर (0.6-0.9 फीट) दूर स्थित शाखाओं को हटाना आम है, ताकि तने से छाल हट जाए और ज़मीन के पास कोई पत्तियां या छाल मौजूद न रहे। अन्य चीजों के अलावा, इससे पत्तियों में मिट्टी के रोग लगने से बचाव होता है। तने को चोट पहुंचने से बचाने के लिए, तने के बहुत करीब स्थित शाखाओं को बहुत सावधानी से काटना चाहिए। इसके अलावा, पौधे के भीतर उगने वाली कुछ मोटी शाखाओं को हटाना ज़रूरी होता है।

लोग आमतौर पर इन पेड़ों को कलात्मक आकार प्रदान करते हैं। हालाँकि, इसके लिए बहुत ज्यादा सावधानी बरतने की ज़रूरत होती है, क्योंकि इससे पौधे को तनाव का सामना करना पड़ सकता है। एक सामान्य नियम के अनुसार, आपको इस बात का ध्यान रखने की ज़रूरत होती है कि छंटाई के बाद पेड़ पर ज्यादातर हरी शाखाएं बची रहें। 10 सेमी (0.3 फीट) से ज्यादा काटकर हमें पेड़ की नयी डंठलों की छंटाई नहीं करनी चाहिए। हम नयी डंठलों का आसानी से पता लगा सकते हैं, क्योंकि वो दिखने में अलग होती हैं, और आमतौर पर हल्के रंगों की होती हैं।

यह साफ है कि सभी प्रजातियों के लिए समान आवृति और मात्रा में छंटाई की ज़रूरत नहीं होती। कुछ प्रजातियां बहुत तेजी से बढ़ती हैं और उन्हें ज्यादा बार छांटना पड़ता है, वहीं अन्य प्रजातियों की धीमी विकास दर की वजह से उनकी छंटाई देर से हो सकती है। गोल्डक्रेस्ट को संभवतः बहुत कम बार छंटाई की ज़रूरत होती है, जिसपर हम केवल कुछ परिधीय शाखाओं को हटाते हैं ताकि इसके आकार को बनाए रखा जा सके। दूसरी ओर, हम किसी परेशानी के बिना लेलैंड की बहुत ज्यादा छंटाई कर सकते हैं। सालों तक एरिज़ोना की सही से छंटाई न करने पर या बिल्कुल भी छंटाई न करने पर, इसकी तेज विकास दर के कारण इसका आकार अनियंत्रित हो जायेगा।

शंकुधारी पेड़ों की छंटाई करते समय, बुनियादी व्यक्तिगत सुरक्षा रखना महत्वपूर्ण है। आजकल हमें बाज़ार में विशेष सुरक्षा चश्मे मिल सकते हैं, ताकि छंटाई के दौरान आपकी आँखों की रक्षा हो सके। हमें अच्छे दस्तानों की भी आवश्यकता होगी, जिससे हमारे हाथ कटने और इसपर चोट लगने से बचा जा सके।

शंकुधारी पेड़ों के कीड़े और बीमारियां

शंकुधारी पेड़ काफी मजबूत होते हैं। लेकिन, बाकी सभी पौधों की तरह उन्हें भी कीड़ों और बीमारियों संबंधी कुछ समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

शंकुधारी पेड़ों के मुख्य शत्रु कोक्वाइडिया की विभिन्न प्रजातियां हैं, जिनमें से सूडोकोकस सबसे महत्वपूर्ण है। उनकी वजह से पौधे को बहुत ज्यादा नुकसान होता है, वहीं साथ ही उनमें से शहद जैसा एक स्राव होता है जो कवक के विकास को बढ़ावा देता है, जिसकी वजह से पौधे को गंभीर परिणाम झेलने पड़ते हैं। संक्रमण होने पर, कीड़े पत्तियों पर दिखाई देते हैं, क्योंकि वो सफ़ेद होते हैं और रुई जैसे लगते हैं। गंभीर सक्रमण की स्थिति में, पौधे की पत्तियां सूख जाती हैं। ज्यादा गर्म तापमान और उमस वाले दिनों के दौरान पौधे ज्यादा संवेदनशील होते हैं।

पत्तियों में अच्छा वायुसंचार न होने पर यह स्थिति ज्यादा खराब हो जाती है। लेलैंड, थूजा और गोल्ड क्रेस्ट इन संक्रमणों के लिए ज्यादा संवेदनशील होते हैं। ऐसी स्थिति रोकने के लिए, पौधों की पत्तियों पर पानी देने से बचें, विशेष रूप से गर्मियों के दौरान। साथ ही, बेहतर वायु संचार के लिए पौधों की अच्छे से छंटाई करना भी सही होता है। समस्या बहुत ज्यादा गंभीर न होने पर, आप अपने हाथों से कीड़े हटाने की कोशिश कर सकते हैं। अगर समस्या पर नियंत्रण पाना संभव नहीं है तो आपको किसी लाइसेंस प्राप्त कृषि विज्ञानी से परामर्श लेना पड़ सकता है।

इसके अलावा, इन पौधों में कवक संक्रमण भी हो सकता है। बगीचे में लगाए जाने वाले शंकुधारी पेड़ों को संक्रमित करने वाला सबसे सामान्य और महत्वपूर्ण रोगाणु है, फाइटोफ्थोरा एसपी। यह कवक मिट्टी में रहता है और पौधे की जड़ प्रणाली को संक्रमित करके गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है, अगर इसका शुरुआत में ही इलाज नहीं होता तो इसकी वजह से पौधा सूख सकता है। कवक संक्रमण के मामलों में, हमें सूखी हुई पत्तियां दिखाई देंगी, जिन्हें कभी-कभी पानी की कमी के कारण माना जा सकता है। उन हिस्सों पर पत्तियां पहले सूखी और भूरी होनी शुरू होती हैं जो ज़मीन के पास होते हैं। रोकथाम करना बीमारी को प्रबंधित करने का सबसे अच्छा तरीका है। हम पौधों को बहुत पास-पास लगाने से, पौधों की जड़ों के पास बहुत ज्यादा नमी होने से, पत्तियों पर पानी डालने से बचते हैं, और हम अक्सर समस्याओं की जांच करते हैं। लेलैंड फाइटोफ्थोरा के लिए सबसे संवेदनशील शंकुधारी पेड़ों में से एक है। जैसे ही हमें अपने शंकुधारी पेड़ में परिवर्तन दिखाई देता है या अगर आपके क्षेत्र में बीमारी का प्रकोप होता है, तो रसायनों के छिड़काव जैसी कार्यवाही पर चर्चा करने के लिए किसी लाइसेंस प्राप्त कृषि विज्ञानी से परामर्श करना उचित होगा। संक्रमित पौधों को बगीचे से तुरंत हटा दिया जाना चाहिए।

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Wikifarmer की संपादकीय टीम
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