मुनाफे के लिए सामान्य सेज कैसे उगाएं – सामान्य सेज की व्यावसायिक खेती

मुनाफे के लिए सेज की खेती – सारांश

पिछले दो दशकों के दौरान मुनाफे के लिए सेज की खेती ने बहुत सारा ध्यान खींचा है। इसकी फसल 6 से 10 साल या उससे भी ज्यादा समय तक रहती है और ऐसे उत्पाद दे सकती हैं जो विभिन्न उद्योगों में प्रयोग किये जा सकते हैं। ताजे और सूखे पत्तों को सॉसेज, मांस, मछली, सलाद और अन्य विभिन्न खाद्य पदार्थों में डाला जाता है। इसके अलावा, सेज का एसेंशियल ऑइल दुनिया भर में बहुत लोकप्रिय उत्पाद है जिसे खुशबू, कॉस्मेटिक, व्यक्तिगत स्वच्छता और कीट विकर्षक उद्योगों में प्रयोग किया जाता है। विशेष प्रबंधन में, स्थानीय परिस्थितियां अनुकूल होने पर इस पौधे को साल (दूसरे साल से) में 2 या यहां तक कि 3 बार भी तक काटा जा सकता है, जिससे यह एक लाभदायक फसल साबित होता है। 

सेज के लिए जलवायु और मिट्टी संबंधी आवश्यकताएं

यह पौधा बहुत दृढ़ और अनुकूल होता है और खराब मिट्टी में भी पनप सकता है। सेज के पौधे लगभग सभी अच्छी जल निकासी वाली मिट्टियों में बढ़ सकते हैं और औसत उपज दे सकते हैं। वे 5,5 से 8 तक पीएच सहन कर सकते हैं। हालाँकि, सबसे अच्छी पैदावार अक्सर लगभग 7 पीएच वाली और बहुत अच्छी जल निकासी की व्यवस्था वाली मिट्टी में होती है।

सेज की खेती करते समय जलवायु सबसे महत्वपूर्ण प्रतिबंधक कारक है। यह पौधा मूल रूप से दक्षिणपूर्व यूरोप से आता है और हल्की सर्दियों और लम्बी गर्मियों वाली भूमध्यसागरीय जलवायु पसंद करता है। हालाँकि, यह कुछ दिनों तक ठंड सहन कर सकता है (लगभग एक सप्ताह तक -10°C)। इसके अतिरिक्त, यह 5000 फीट (1500 मीटर) तक की ऊँचाई में भी पनप सकता है। सामान्य सेज धूपदार स्थानों में विकसित होता है। साल्विया की खेती पठारों में भी की जा सकती है। सेज के लिए मिट्टी का सबसे उपयुक्त तापमान 60º-70ºF (15-21 °C) के बीच होता है।

सामान्य सेज उगाना – बीजारोपण दर

सामान्य सेज को i) खेत में सीधे बीज लगाकर, ii) गमलों में बीजारोपण करके और इसके बाद रोपकर और iii) कलम से, फैलाया जा सकता है। किसी आंतरिक सुरक्षित वातावरण में बीज से खेती वसंत (मार्च) की शुरुआत में होती है और वसंत के दौरान अंतिम पाले के बाद रोपाई शुरू होती है। हालाँकि, कुछ किसान शरद ऋतु में भी पौधों की रोपाई करते हैं। एक सामान्य नियम के अनुसार, हर्ब उत्पादक यौन प्रजनन (बीज से) के बजाय वनस्पति से प्रसार करना ज्यादा पसंद करते हैं, क्योंकि इससे उन्हें निश्चित रूप से मूल किस्म के समान पौधे प्राप्त होंगे। हालाँकि, साल्विया ऑफिसिनैलिस और कुछ अन्य सुगंधित और औषधीय पौधों को बड़े पैमाने पर बीज से भी उगाया जाता है। सेज के बीज आमतौर पर लैवेंडर, थाइम और तुलसी से बड़े होते हैं। उचित परिस्थितियों में वो आसानी से अंकुरित हो जाते हैं।

सीधे बीज लगाना

अगर आप सीधे अपने खेत में बीज बोते हैं, तो आपको प्रति हेक्टेयर 400-500 ग्राम (15-17 औंस) बीज की आवश्यकता होगी। सीधे बीज बोने की स्थिति में, हमें लगभग हर हफ्ते जंगली घास नियंत्रित करना पड़ता है, क्योंकि जंगली घास हमारे सेज पौधों के बीच उग जाती हैं। हमें पौधों को कम भी करना होगा ताकि अंत में हम प्रति हेक्टेयर उचित मात्रा में पौधे छोड़ सकें, जिससे फसल के वायु संचार और सामान्य स्वास्थ्य में सुधार होगा।

कलम लगाना

अगर हम वसंत के दौरान पौधे लगाने की सोचते हैं, तो कलमों को 4.0-4.7 इंच (10-12 सेमी) की लम्बाई में शरद ऋतु के अंत में काटा जाता है। जड़ निकलने में सामान्य तौर पर लगभग 5-6 महीने का समय लगेगा। छोटे तने और फ्लेवर बढ़ाने के लिए, वसंत ऋतु में पौधा बड़ा होने के बाद हम कुछ पत्तियों को हाथ से तोड़ सकते हैं।

सामान्य सेज लगाना – प्रति हेक्टेयर सामान्य सेज के पौधों की संख्या

खेत में सेज के पौधे लगाते समय, पंक्तियों के बीच की औसत दूरी 30-35 इंच (75-90 सेमी) और एक पंक्ति में पौधों के बीच की दूरी 24-28 इंच (60-70 सेमी) हो सकती है। पौधों के बीच की दूरी चुनी गयी किस्म पर निर्भर करती है। उदाहरण के लिए, हम छोटी किस्मों को लगभग 11 इंच (30 सेमी) और बड़ी किस्मों को लगभग 32 इंच (80 सेमी) की दूरी पर लगा सकते हैं। सेज के पौधों की संख्या 12.000 – 24.000 पौधे/हेक्टेयर होती है (1 हेक्टेयर = 2,47 एकड़ = 10,000 वर्ग मीटर)। घनत्व मिट्टी के प्रकार के अनुसार अलग-अलग होता है। उदाहरण के लिए, अगर हमारी मिट्टी खराब होती है तो हम आमतौर पर अपनी उपज को बढ़ाने के लिए प्रति हेक्टेयर पौधों की संख्या बढ़ाना चाहेंगे। वहीं दूसरी ओर, मिट्टी अच्छी होने पर, हम पौधों को दूर लगाएंगे और उन्हें अच्छी पत्तियां बनाने के लिए प्रेरित करेंगे। ऊंचाई भी हमारी रोपाई की दूरी को प्रभावित कर सकती है। एक सामान्य नियम के अनुसार, ज्यादा ऊंचाई पर लगाए गए सेज के पौधों को ज्यादा सघनता से लगाया जाता है, ताकि उन्हें ठंडी हवा से बचाया जा सके। नम स्थितियों में, पंक्ति में पौधों के बीच और पंक्तियों के बीच ज्यादा दूरी रखना बेहतर होता है, ताकि हवा का संचार बढ़ सके।

सामान्य सेज की पानी संबंधी आवश्यकताएं

सेज को किसी अतिरिक्त सिंचाई या खाद के बिना खेतों में लगाया जा सकता है। इसे एक सूखी फसल माना जाता है और कुछ किसानों ने बताया है कि सिंचाई न करने पर कुछ किस्मों से ज्यादा अच्छी फसल पायी जा सकती है। बहरहाल, अगर हम हर वर्ष एक से ज्यादा बार कटाई करने की उम्मीद करते हैं, तो सिंचाई से पौधे के विकास में वृद्धि होती है। इसलिए, अगर हम सभी आवश्यक सावधानियां बरतते हुए सिंचाई करने का निर्णय लेते हैं, तो हम किसी वर्ष में दूसरी या तीसरी बार भी फसल की कटाई कर सकते हैं। हालाँकि, सामान्य सेज सूखा सहन कर सकता है, लेकिन सिंचाई से छोटे पौधों को पनपने में मदद मिल सकती है। कई किसान ड्रिप सिंचाई और पानी भरने का प्रयोग करते हैं, लेकिन अन्य सिंचाई विधियों जैसे स्प्रिंकलर भी प्रयोग किया जा सकता है।

सामान्य सेज की खाद संबंधी जरूरतें

सेज बंजर मिट्टियों में उगने के लिए मशहूर है, जहाँ कई दूसरी फसलों को नहीं उगाया जा सकता है। अनुभवी किसानों के अनुसार, सेज और लैवेंडर उन फसलों के उदाहरण हैं जिन्हें किसी भी खाद की आवश्यकता नहीं होती है। हालाँकि, आज के प्रतिस्पर्धी परिदृश्य में व्यावसायिक रूप से सेज की खेती करने के लिए मिट्टी के पोषक तत्वों के निरीक्षण, सुधार और वृद्धि की दिशा में कुछ कदम उठाना जरूरी है, ताकि हमारे पौधे 10-12 वर्षों तक ज्यादा पैदावार दे सकें। जैसा कि हर दूसरी फसल के संबंध में होता है, खाद डालने की कोई भी सर्वव्यापक रूप से प्रयोग की जाने वाली विधि नहीं है, क्योंकि हर खेत अलग है और इसकी अलग-अलग जरूरतें हैं। किसी लाइसेंस प्राप्त कृषि विज्ञानी से परामर्श लेकर, पोषक तत्वों की कमियों का पता लगाने और सुधारात्मक कार्यवाही करने के लिए, साल में एक बार मिट्टी का विश्लेषण करना बहुत जरूरी है।

कुछ किसान बताते हैं कि प्रति हेक्टेयर 700 पाउंड (318 किग्रा) की दर से (एन:पी:के) 5: 5: 5 का संतुलित उर्वरक डालने से पौधों की उपज में काफी वृद्धि होती है, विशेष रूप से तब जब हम एक साल में कई बार कटाई करने की उम्मीद करते हैं। आमतौर पर, यह मात्रा 2 या 3 बार में डाली जाती है, जहाँ पहली कटाई के तुरंत बाद इसकी शुरुआत होती है।

एसेंशियल ऑइल के लिए सेज की खेती करते समय, हम पत्तियों पर खाद (एन:पी:के 20:20:20) डालने और एरोबिक्यूलर माइकोरिज़ल कॉलोनाइजेशन पर विचार कर सकते हैं। सोसाइटी ऑफ केमिकल इंडस्ट्री के अनुसार (1) एक निश्चित एरोबिक्यूलर माइकोरिज़ल कॉलोनाइजेशन और पत्ते पर खाद डालने के पैटर्न की वजह से प्राप्त एसेंशियल ऑइल की गुणवत्ता और मात्रा में वृद्धि देखी गयी है।

हालाँकि, अन्य प्रयोगों में जैसे, (2) जैव-उर्वरकों (एन-ठीक करने वाले बैक्टीरिया) का एसेंशियल ऑइल की उपज या रासायनिक संरचना पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा।

हालाँकि, ये केवल सामान्य पैटर्न हैं जिनका पालन अपना शोध किये बिना नहीं किया जाना चाहिए। हर खेत अलग है और इसकी अलग-अलग जरूरतें हैं। खाद डालने के बाद आपके सेज के पौधे एसेंशियल ऑइल या पौधे की सामग्री के संबंध में ज्यादा उपज दे भी सकते हैं और नहीं भी दे सकते हैं। आप मिट्टी का विश्लेषण करने के बाद किसी लाइसेंस प्राप्त कृषि विज्ञानी से सलाह ले सकते हैं।

सामान्य सेज के लिए जंगली घास का प्रबंधन

दुर्भाग्य से, सेज के पौधे अक्सर जंगली घासों से पीड़ित होते हैं, जो स्थान, धूप, पानी और पोषक तत्वों के संबंध में पौधे से प्रतिस्पर्धा करते हैं। जंगली घास की मौजूदगी पौधे से काटी गयी ताज़ी सामग्री की मात्रा साथ ही साथ एसेंशियल ऑइल की गुणवत्ता दोनों पर नकारात्मक प्रभाव डालती है। सभी सेज उत्पादकों के पास घासफूस पर नियंत्रण के लिए एक अच्छी रणनीति होनी चाहिए, जो उनके देश, कानूनी संरचना, उत्पादन के साधनों, उत्पाद के लक्षित उद्योग आदि के आधार पर काफी अलग हो सकती है। कुछ मामलों में, साप्ताहिक रूप से, हाथ से जंगली घास का नियंत्रण बहुत आवश्यक होता है (जैविक उत्पादन)।

सेज उगाने वाले कुछ किसान पौधे की पंक्तियों के बीच स्थित मिट्टी को एक विशेष काली चटाई से ढँक देते हैं। वो पंक्ति के अंदर छोटे पौधों के बीच की जगह को भी काली चटाई से ढँक देते हैं। काली चटाई मिट्टी के तापमान को बढ़ाते हुए घासफूस के विकास को रोकती है।

सामान्य सेज के कीड़े और बीमारियां

सामान्य सेज अक्सर एफिड्स से पीड़ित होता है। इसके अलावा, मिट्टी में अच्छी जल निकासी न होने पर या बहुत ज्यादा सिंचाई करने पर पौधे की जड़ भी सड़ सकती है। सेज के स्वस्थ पौधे उगाने के लिए कीड़ों के लिए एक प्रतिकूल परिवेश बनाना जरूरी है। हम अपने सेज के पौधों को धूप में उगा सकते हैं। हम नियमित रूप से पानी डाल सकते हैं, लेकिन मिट्टी में अच्छी जल निकासी की व्यवस्था होनी चाहिए। हमें सूखी पत्तियों या फूलों को भी हटाना पड़ सकता है। हम किसी भी अनचाहे घासफूस को भी हटा सकते हैं जो विभिन्न कीड़ों को आकर्षित कर सकते हैं। अगर आपने सभी आवश्यक सावधानी बरती हैं और फिर भी समस्या बनी हुई है, तो आप अपने स्थानीय लाइसेंस प्राप्त कृषि विज्ञानी से सलाह ले सकते हैं।

सामान्य सेज की कटाई

साल्विया ऑफिसिनैलिस को इसके पत्तों (ताजे और सूखे पत्ते) और एसेंशियल ऑइल के लिए काटा जाता है। सामान्य तौर पर, हम साल में 2 या 3 बार फसल की कटाई कर सकते हैं। हालाँकि, हर साल कई बार कटाई करना आसान काम नहीं है और इसके लिए अनुभव की आवश्यकता होती है। कटाई सत्रों के बीच इसमें सिंचाई की और खाद डालने की भी आवश्यकता हो सकती है ताकि पौधे जल्दी से दोबारा बढ़ सकें। हम दूसरे वर्ष से एकाधिक बार कटाई करने के लिए तैयार होते हैं।

प्रयोगों (3) से पता चला है कि एसेंशियल ऑइल की अधिकतम गुणवत्ता और मात्रा तब प्राप्त होती है जब हम वानस्पतिक चरण के बजाय फूल खिलने के चरण में कटाई करते हैं।

अन्य प्रयोगों (4) के अनुसार, दूसरी कटाई (सामान्य रूप से गर्मियों में अंत में – अगस्त) से पहली कटाई की तुलना में सूखे हर्ब और एसेंशियल ऑइल की ज्यादा उपज प्राप्त होती है, जो वसंत के अंत में (मई) की जाती है। आमतौर पर, पहली बार कटाई से पहले पौधे में बहुत सारे पत्ते आने के लिए हमें काफी इंतज़ार करना पड़ता है।

विकासशील देशों में, किसान पत्तियों के पहले सेट के ठीक नीचे कैंची से काटकर सेज की कटाई करते हैं। ट्रैक्टरों से जुड़ी मशीनों के माध्यम से सेज को यांत्रिक रूप से काटा जा सकता है। नए विकास को बढ़ावा देने के लिए ये मशीनें तने को पूर्वनिर्धारित लंबाइयों में काटती हैं।

सेज के पत्तों में पानी की कम मात्रा के कारण वो तेजी से सूख जाते हैं। ताज़ा हर्ब्स के रूप में वो 2-3 सप्ताह और सूखे हर्ब्स के रूप में वो कई महीनों तक रह सकते हैं। कटाई के बाद, हम काटे गए हिस्सों को छाया वाली जगह पर रख सुखा सकते हैं या किसी विशेष ड्रायर में सुखा सकते हैं। हम पत्तियों का रंग उतारने के लिए और वाष्पशील तेल की गुणवत्ता और सांद्रता बचाने के लिए ऐसा करते हैं।

सामान्य सेज हर्ब और एसेंशियल ऑइल की उपज

साल्विया की सूखी सामग्री से निकाला गया एसेंशियल ऑइल इसकी किस्म, उगाने की विधियों (उर्वरीकरण, सिंचाई आदि) और कटाई के समय पर निर्भर करता है।

एक साल में दो बार कटाई से औसतन 7000 किग्रा प्रति हेक्टेयर की पैदावार मिलती है (दो साल से पुरानी फसल के लिए)।

ध्यान रखें कि 1 हेक्टेयर = 10,000 मी² = 2,47 एकड़ और 1 टन = 1000 किग्रा = 2200 पाउंड। पत्तियों की इतनी मात्रा से, आप प्रति हेक्टेयर 8-20 किलोग्राम एसेंशियल ऑइल की उम्मीद कर सकते हैं। यह उपज वार्षिक (प्रति वर्ष कुल उपज) होती है और आमतौर पर दो या तीन कटाई सत्रों (वसंत के अंत से शरद ऋतु की शुरुआत तक) के बीच होती है। ये आंकड़े अनुभवी किसानों द्वारा स्वस्थ और परिपक्व सेज के पौधों के लिए हैं।

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संदर्भ

  1. https://onlinelibrary.wiley.com/doi/pdf/10.1002/jsfa.3871
  2. https://www.researchgate.net/
  3. https://www.tandfonline.com/doi/abs/10.1080/10412905.1997.9699457
  4. http://www.hortorumcultus.actapol.net/volume2/issue2/abstract-85.html
  5. https://www.rhs.org.uk/plants/details?plantid=6145

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