मुनाफे के लिए खेतों में बैंगन उगाना – शुरू से अंत तक बैंगन की खेती के लिए संपूर्ण मार्गदर्शक

खेतों में बैंगन उगाना – सोच-समझकर और बड़े पैमाने पर की गयी बैंगन की खेती आय का बढ़िया स्रोत हो सकती है। सरल शब्दों में कहा जाए तो बैंगन एक बारहमासी पौधा है, लेकिन ज्यादातर किसान इसे वार्षिक पौधे के रूप में लगाते हैं। बैंगन के ज्यादातर व्यावसायिक किसान फसल को आंतरिक सुरक्षित परिवेश में बीजों (हाइब्रिड) से शुरू करते हैं। पौधे उगने का इंतज़ार करते हुए और उनकी रोपाई की तैयारी करते हुए (सामान्य तौर पर 4-6 हफ्ते), वो खेत तैयार करते हैं। वे खेत की जुताई करके क्यारियां बना देते हैं और पंक्तियों में काली प्लास्टिक की फिल्म बिछा देते हैं। काला प्लास्टिक न केवल मिट्टी की गर्म रहने में सहायता करता है, बल्कि जंगली घास भी नियंत्रित करता है। वो ड्रिप सिंचाई प्रणाली डिज़ाइन करके, उसे भी लगा देते हैं। रोपाई के लिए तैयार होने पर, वो प्लास्टिक की फिल्म में छोटे-छोटे छेद कर देते हैं, जहाँ वो छोटे गड्ढे बनाकर पौधों की रोपाई करते हैं। ज्यादातर मामलों में उर्वरीकरण, ड्रिप सिंचाई और जंगली घास के प्रबंधन का प्रयोग किया जाता है। जब पौधा 40 सेमी (16 इंच) का हो जाता है तो ज्यादातर किसान पौधों को सहारा देने के लिए, वायु संचार बेहतर बनाने के लिए और कुछ हफ्ते बाद फसल की कटाई में सुविधा के लिए पौधों में डंडिया लगा देते हैं। पौधों को पतला करने की प्रक्रिया भी प्रयोग की जाती है। व्यावसायिक बैंगन उत्पादक खराब या अविकसित फलों को हटा देते हैं ताकि पौधे अपने संसाधनों को बड़े और ज्यादा स्वादिष्ट फल उगाने के लिए प्रयोग कर सकें। बैंगन की अधिकांश व्यावसायिक किस्मों को रोपाई के 60-100 दिनों के बाद काटा जा सकता है। रोपाई से लेकर कटाई तक का समय पौधे की किस्म, जलवायु की स्थितियों और लगाए गए पौधों की आयु पर निर्भर करता है। कटाई केवल कैंची या चाकू के माध्यम से की जा सकती है और आमतौर पर एक से ज्यादा सत्रों में की जाती है। कटाई के बाद, बैंगन उगाने वाले किसान खेत में हल चलाकर, फसल के अवशेष को नष्ट कर देते हैं। बीमारियों को नियंत्रित करने के लिए या मिट्टी को क्षय से बचाने के लिए, वो फसल चक्र (पत्तागोभी, मक्का, दाल आदि) का प्रयोग भी कर सकते हैं।

बैंगन उगाते समय प्रतिबंधात्मक कारक हमेशा जलवायु होता है। बैंगन का पौधा गर्म जलवायु से आता है। यह कम तापमान और तुषार के प्रति बेहद संवेदनशील पौधा है। इसके लिए 21 से 30°C (70 से 85 °F) के औसत तापमान की आवश्यकता होती है, जबकि मिट्टी का तापमान 20 °C (68 °F) से कम नहीं होना चाहिए। बैंगन उगाने की अवधि के दौरान ठंडा मौसम पौधे के विकास को रोक देगा और ठंड से प्रभावित पौधों के लिए रिकवर होना और अच्छी पैदावार देना लगभग नामुमकिन हो जायेगा। 

सबसे पहले, बैंगन उगाने की विधि साथ ही साथ हमारे क्षेत्र में फलने-फूलने लायक बैंगन की किस्मों का फैसला करना जरूरी है। बैंगन उगाने की 2 विधियां हैं: बीज से उगाना और पौधों से उगाना।

बीज से बैंगन उगाना

बैंगन लंबी अवधि की फसल है। रोपाई से लेकर कटाई तक उन्हें औसतन 60 से 100 दिनों की आवश्यकता होती है। हालाँकि, यदि आप बीज से बैंगन उगाने की योजना बना रहे हैं, तो कुछ ऐसे तथ्य हैं जिन्हें आपके लिए जानना आवश्यक है। सबसे पहले, बीजों के अंकुरण के लिए बैंगन के बीजों को कम से कम 21 °C (70 ° F) मिट्टी के तापमान की आवश्यकता होती है। दूसरा, अंकुरित होने के लिए बीज के लिए नमी का सर्वोत्तम स्तर होना महत्वपूर्ण है। अधिक सिंचाई हानिकारक हो सकती है। मौसम और मिट्टी की स्थितियों के आधार पर बैंगन के बीज लगभग 8-17 दिनों में अंकुरित होना शुरू हो जाते हैं। जिन क्षेत्रों में पाला पड़ने का जोखिम होता है, वहां किसान नियंत्रित स्थितियों में बीज की क्यारियों में बीज बोना पसंद करते हैं और इसके बाद उन्हें अंतिम स्थितियों में लगा देते हैं। उचित वायु संचार के लिए आमतौर पर वे अंतर्निहित परत के रूप में घास बिछी हुई भूमि का प्रयोग करते हैं। वसंत के दौरान गर्म मौसम वाले इलाकों में, किसान सीधे खेत में बीज लगा सकते हैं। हालाँकि, यह विधि काफी सस्ती है, लेकिन बाद में फसल बढ़ने पर ज्यादा परेशानियां पैदा करती है।

पौधों से बैंगन उगाना

अगर आप पौधों से बैंगन की खेती शुरू करना चाहते हैं, तो किसी वैध विक्रेता से रोग-मुक्त पौधे खरीदना जरूरी होता है। पौधे में 3-4 पत्तियां आने के बाद (4-6 हफ्ते), रोपाई करना सबसे अच्छा रहता है। मिट्टी का तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा न होने पर, रोपाई खराब होने की संभावना ज्यादा होती है। इसलिए ज्यादातर देशों में वसंत ऋतु का दूसरा भाग बैंगन के पौधों की रोपाई के लिए सबसे अच्छा होता है।

बैंगन की खेती के लिए मिट्टी की आवश्यकताएं और तैयारी

बैंगन उगाते समय, मिट्टी बहुत कम ही कोई अवरोधी कारक होती है। हालाँकि, इसके पौधे उचित वायु संचार और जल निकासी की व्यवस्था वाली रेतीली मिट्टियों में सबसे अच्छी तरह पनपते हैं। अपनी गहरी जड़ों के कारण, यह टमाटर के पौधे की तुलना में सूखे को ज्यादा सहन कर सकता है। वहीं दूसरी तरफ, बैंगन को बिल्कुल गीली मिट्टी पसंद नहीं है। बैंगन के लिए सबसे अच्छा पीएच स्तर 6 से 7 का होता है। ऐसे मामले भी हैं, जिनमें किसानों ने 8,5 पीएच वाली मिट्टी में बैंगन उगाकर औसत उपज प्राप्त की है, लेकिन इसके लिए विशेष प्रबंधन की जरूरत होती है।

बैंगन के पौधे की रोपाई से लगभग 1 महीने पहले मिट्टी की सामान्य तैयारी शुरू हो जाती है। किसान उस समय अच्छी तरह जुताई करते हैं। जुताई से मिट्टी में वायु संचार और जल निकासी में सुधार होता है। साथ ही, जुताई करने पर मिट्टी से कंकड़-पत्थर और दूसरी अनचाही चीजें निकल जाती है।

एक हफ्ते बाद, कई किसान किसी स्थानीय लाइसेंस प्राप्त कृषि विज्ञानी से परामर्श के बाद, अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद या सिंथेटिक व्यावसायिक खाद जैसे पूर्व-रोपण खाद डालते हैं। ज्यादातर किसान उसी दिन टिलेज ट्रैक्टरों का प्रयोग करके खाद की एक समान परत खेत पर बिछा देते हैं। अगला दिन ड्रिप सिंचाई की पाइप लगाने का सही समय होता है। इसे लगाने के बाद, यदि मिट्टी के विश्लेषण में मिट्टी में संक्रमण की समस्या पता चली है तो कुछ किसान सिंचाई प्रणाली के माध्यम से मृदा कीटाणुशोधन पदार्थ भी डाल सकते हैं (अपने क्षेत्र में लाइसेंस प्राप्त कृषि विज्ञानी से पूछें)।

अगला और सबसे महत्वपूर्ण चरण है, एक सीधी रेखा में पॉलिथीन बिछाना (विशेष रूप से उन देशों में जहाँ बैंगन लगाने के मौसम के दौरान मिट्टी का तापमान पर्याप्त रूप से गर्म नहीं होता)। कई उत्पादक काले या हरे रंग के इन्फ्रारेड-संचारण (आईआरटी) या काली प्लास्टिक की फिल्म से पंक्तियों को ढंक देते हैं। वे इस तकनीक का उपयोग इसलिए करते हैं, ताकि जड़ क्षेत्र का तापमान उचित स्तर (>21 °C या 70 °F) पर बना रह सके और जंगली घास को बढ़ने से रोका जा सके।

बाहर बैंगन का पौधा लगाना और पौधों के बीच दूरी

बैंगन का उत्पादन करने वाले कई देशों में, बाहर बैंगन लगाने के लिए वसंत का दूसरा भाग सबसे उपयुक्त समय होता है। उस समय, ज्यादातर मामलों में तापमान 21 °C (70 °F) के करीब पहुंच जाता है और पाला पड़ने का खतरा गुजर गया होता है।

हालाँकि, संयुक्त राज्य (फ्लोरिडा) और संयुक्त अरब अमीरात में, आमतौर पर अगस्त के दौरान रोपाई की जाती है और फसल की कटाई नवंबर के बाद शुरू होती है। सामान्य तौर पर, किसान 4 से 6 हफ्ते की आयु वाले पौधे पसंद करते हैं। उस समय तक उनमें 3 से 4 पत्तियां आ जाती हैं। ऐसे मामले भी हैं जिनमें किसानों ने 8-10 सप्ताह के पौधे लगाए हैं। इस तकनीक की वजह से रोपाई से कटाई का समय कम हो जायेगा।

रोपाई से 1 महीने पहले शुरू किये गए तैयारी के सभी चरणों के बाद (जुताई, सामान्य उर्वरीकरण, टिलेज, सिंचाई प्रणाली की स्थापना और प्लास्टिक से ढंकना), हम रोपाई शुरू कर सकते हैं। किसान पॉलीथिन की प्लास्टिक की सतह पर उन जगहों को चिन्हित कर देते हैं, जहाँ वो छोटे पौधे लगाएंगे। इसके बाद वो प्लास्टिक पर छेद करके पौधे लगाते हैं। पौधों को उतनी ही गहराई में लगाना जरूरी है जितनी गहराई में उन्हें नर्सरी में लगाया गया था।

उत्पादक बैंगन के पौधे एकल या दोहरी पंक्तियों में लगा सकते हैं। एकल पंक्तियों में रोपाई का सामान्य पैटर्न है: पंक्ति में पौधों के बीच 0.4 मीटर से 0.8 मीटर (18-35 इंच) की दूरी और पंक्तियों के बीच 1.2 मीटर से 1.5 मीटर (4-5 फीट) की दूरी। दोहरी पंक्तियों के लिए किसान पसंद करते हैं: पंक्ति में पौधों के बीच 0.4 मीटर से 0.8 मीटर (18-35 इंच) की दूरी और पंक्तियों के बीच 0.9 मीटर से 1.2 मीटर (3-4 फीट) की दूरी। इस पैटर्न से, हम प्रति हेक्टेयर लगभग 10000-20000 पौधे लगाएंगे। हालाँकि, हमेशा ऐसा नहीं होता। कई किसान प्रति हेक्टेयर 25.000 से 35.000 पौधे भी लगाते हैं। दूरी और पौधों की संख्या, बैंगन के किस्म, पर्यावरण की स्थिति और निश्चित रूप से उत्पादक के उपज के लक्ष्यों पर निर्भर करती है। (1 हेक्टेयर = 2,47 एकड़ = 10.000 वर्ग मीटर)।

बैंगन को सहारा देना

ज्यादातर बैंगन उत्पादक अपने बैंगन के पौधों को सहारा देने के लिए डंडियां लगाते हैं। इस तकनीक के प्रयोग के कई लाभ हैं। सबसे पहले, सहारा देने से पत्तियां और फल जमीन के संपर्क में आने से बचते हैं, और साथ ही वायु संचार के लिए उन्हें ज्यादा जगह मिलती है। इसके अलावा, कटाई में आसानी होती है। पौधे की लम्बाई 40 सेमी (16 इंच) हो जाने के बाद, सहारा देना शुरू करना सबसे अच्छा होता है। किसान हर पौधे को 0.5 सेंटीमीटर (1 इंच) मोटी और 1-1.5 मीटर (50-60 इंच) लंबी लकड़ी से बांध देते हैं।

बैंगन की छंटाई – एक विवादास्पद विधि

कुछ बैंगन उत्पादक अपने बैंगनों की छंटाई करना पसंद करते हैं, वहीं दूसरों का दावा है कि छंटाई से विकास रुक जाता है और पौधे में फल देर से आते हैं। अपने पौधों की छंटाई करने वाले किसान, यह विकास के शुरूआती चरणों के दौरान करते हैं, जब इसमें केवल 3-4 तने होते हैं। इस विधि से वो पौधे को दो वी आकार वाली मुख्य शाखाओं से विकसित होने के लिए विवश करते हैं। बैंगन उगाने के संपूर्ण मौसम के दौरान, वो अतिरिक्त पत्तियों को हटाते रहते हैं ताकि उचित वायु संचार बना रहे। इस तरह, वो नमी से होने वाले संक्रमणों से पौधे को बचाते हैं। इसके अलावा, कुछ किसान ज्यादातर अतिरिक्त पंखुड़ियों वाले फूल हटा देते हैं और पौधे पर केवल सबसे मजबूत फूलों को छोड़ते हैं। इससे पौधा बाकी बचे हुए फूलों में अपने पोषक तत्वों को ज्यादा अच्छे से वितरित कर पाता है। ये फूल आखिर में ज्यादा बड़े फल देंगे।

बैंगन की पानी संबंधी जरूरतें और सिंचाई प्रणालियाँ

उटा राजकीय विश्वविद्यालय के अनुसार, 2.5-5 सेमी पानी (प्रति सप्ताह 1-2 इंच) डालना, बैंगन के लिए उचित सिंचाई योजना है। जाहिर तौर पर, अलग-अलग मौसम और मिट्टी की परिस्थिति के आधार पर पानी की जरूरतें बिल्कुल अलग हो सकती हैं। उदाहरण के लिए, चिकनी मिट्टी के लिए आमतौर पर रेतीली मिट्टी की तुलना में कम पानी की आवश्यकता होती है। इसके अलावा, वातावरण में ज्यादा नमी होने पर या बारिश के दिनों में सिंचाई की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं हो सकती है। दूसरी ओर, बहुत ज्यादा तापमान वाला सूखा दिन होने पर एक से ज्यादा बार सिंचाई करने की जरूरत पड़ सकती है। अलग-अलग बैंगन की किस्मों के लिए अलग-अलग पानी की जरूरतें होती हैं।

सामान्य नियम के अनुसार, परागण से फल लगने तक पौधे की पानी की जरूरतें बढ़ती हैं। भूमध्यसागरीय देशों में कई किसान, शुरूआती चरणों के दौरान, हर 2-3 दिन पर प्रत्येक पौधे में 1 लीटर पानी से सिंचाई करना पसंद करते हैं। फल आने के चरणों के दौरान और जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है (>35 °C), वो सिंचाई सत्र बढ़ा देते हैं क्योंकि इन चरणों पर पौधों को बहुत ज्यादा पानी की जरूरत होती है। इस चरण पर, मौसम की स्थितियों के आधार पर वो हर दिन, या दिन में दो बार भी सिंचाई कर सकते हैं। गर्म अवधियों के दौरान, बादल वाला दिन होने पर वो सुबह-सुबह अपने बैंगन के पौधों की सिंचाई करते हैं, और रात में एक और बार सिंचाई करते हैं। पत्तियों को पानी देने को बीमारियों के प्रकोप से जोड़ा गया है। सामान्य तौर पर, विशेष रूप से पत्तियों पर, ज्यादा नमी से बीमारियां फैल सकती हैं। दूसरी ओर, पानी की कमी के कारण पौधे रोगों के लिए अतिसंवेदनशील हो जाते हैं।

इसके लिए आमतौर पर ड्रिप सिंचाई प्रणाली का प्रयोग किया जाता है। ज्यादातर किसान कई या एक बार प्रयोग होने वाले ड्रिप स्ट्रिप का प्रयोग करके हैं, जहाँ ड्रिप के बीच 20 सेमी (7.8 इंच) की दूरी होती है।

बैंगन का परागण

बैंगन स्व-परागण वाला पौधा है। लेकिन, ऐसा बताया गया है कि मधुमक्खियां परागण को बेहतर बना सकती हैं, और इससे फल लगने और प्रति हेक्टेयर कुछ उपज में भी सुधार होता है।

बैंगन की खाद संबंधी आवश्यकताएं

कोई भी खाद डालने की विधि प्रयोग करने से पहले, सबसे पहले, आपको अपने खेत की मिट्टी के अर्धवार्षिक और वार्षिक परीक्षण से प्राप्त डेटा के आधार पर मिट्टी की स्थिति को ध्यान में रखना चाहिए। कोई भी दो खेत समान नहीं होते, और न ही कोई आपकी मिट्टी के परीक्षण डेटा, ऊतक विश्लेषण और आपके खेत के फसल इतिहास को ध्यान में रखे बिना उर्वरीकरण विधियों की सलाह दे सकता है। हालाँकि, हम काफी सारे किसानों द्वारा प्रयोग की जाने वाली, सामान्य उर्वरीकरण योजनाओं को यहाँ सूचीबद्ध करेंगे।

सबसे अधिक इस्तेमाल की जाने वाली उर्वरीकरण विधि है “फर्टिगेशन”। किसान ड्रिप सिंचाई प्रणाली में पानी में घुलनशील उर्वरकों को मिला देते हैं। इस तरह, वो धीरे-धीरे पोषक तत्व प्रदान कर सकते हैं और पौधों को उन्हें अवशोषित करने का उचित समय देते हैं।

आजकल किसान 2 से 3 महीने की संपूर्ण बैंगन उगाने की अवधि के दौरान रोपाई से फसल काटने तक 0 से 10 बार खाद डालते हैं। कई किसान रोपाई से दो महीने पहले पंक्तियों में सड़ी हुई गोबर की खाद जैसे पूर्व-रोपाई खाद डालते हैं। वे रोपाई से लगभग एक हफ्ते पहले फॉस्फोरस की ज्यादा मात्रा वाला पूर्व-रोपाई उर्वरक भी डालते हैं और रोपाई के 10 दिन बाद फर्टिगेशन शुरू करते हैं। उस समय, वे सूक्ष्म तत्वों से भरपूर, नाइट्रोजन-फॉस्फोरस-पोटैशियम 13-40-13 उर्वरक डालते है। शुरूआती चरणों में फॉस्फोरस का उच्च स्तर पौधों की मजबूत जड़ प्रणाली विकसित करने में मदद करेगा। इसके अतिरिक्त, कई मामलों में सूक्ष्म पोषक तत्व पौधों के लिए प्रत्यारोपण के कारण उत्पन्न होने वाली किसी भी नुकसानदायक स्थिति का सामना करना आसान बनाते हैं। 3 दिन बाद, वो दोबारा 13-40-13 डालते हैं।

इसके बाद के दिनों में, वो हफ्ते में एक बार पानी में घुलनशील एन-पी-के 20-20-20 डालते हैं। वो 20-20-20 डालना जारी रखते हैं जब तक कि फल अपने वजन के ⅔ तक नहीं पहुंच जाता है। इसके बाद से, वो बैंगन में KNO3 और/या Κ₂SO4 डालकर, पोटैशियम का स्तर बढ़ाना शुरू कर देते हैं। इन चरणों पर, पौधों को आमतौर पर पोटैशियम की ज्यादा जरूरत होती है ताकि पौधे में ज्यादा बड़े और अच्छे आकार के फल आ सकें।

बैंगन के लिए अन्य सामान्य फर्टिगेशन प्रोग्राम में यूरिया, पोटेशियम नाइट्रेट और EDDHA शामिल हैं। यूरिया को रोपाई से 2-4 सप्ताह पहले सिंचाई प्रणाली में शामिल किया जाता है, KNO3 को रोपाई के 6 हफ्ते बाद से कटाई से पहले अंतिम चरणों तक डाला जाता है, जबकि EDDHA उगने की संपूर्ण अवधि के दौरान शामिल किया जाता है।

हालाँकि, ये केवल सामान्य पैटर्न हैं जिनका अपना खुद का शोध किये बिना पालन नहीं करना चाहिए। हर खेत अलग है और इसकी अलग-अलग जरूरतें हैं। किसी भी उर्वरीकरण विधि का प्रयोग करने से पहले मिट्टी के पोषक तत्वों और पीएच की जाँच महत्वपूर्ण होती है। आप अपने स्थानीय लाइसेंस प्राप्त कृषि विज्ञानी से परामर्श ले सकते हैं।

बैंगन के कीड़े और बीमारियां

फसल चक्र और टिलेज, कीड़ों और बीमारियों के खिलाफ पहली सावधानी है। दूसरी सावधानी बरतने के रूप में आप केवल प्रमाणित और बीमारी-रहित बीज और पौधे खरीद सकते हैं।

बैंगन के कीड़े

कोलोराडो पोटैटो बीटल

कोलोराडो पोटैटो बीटल (लेप्टिनोटार्सा डिसम्लिनेटा) – अपने नाम के बावजूद – ये कीड़े केवल आलुओं पर ही नहीं, बल्कि बैंगनों पर भी हमला करते हैं। यह कीड़ा सर्दियों में जमीन पर रहता है और वसंत ऋतु के दौरान प्रजनन करना शुरू करता है। बीटल के लार्वा बैंगन की पत्तियों को खा जाते हैं, जिससे पूरी फसल को गंभीर नुकसान होता है। बताया गया है कि बीन्स के साथ बैंगन लगाने पर बैंगन बीटल के हमले से सुरक्षित रहते हैं।

उनकी आबादी पर हर समय नज़र रखना अच्छी तकनीक हो सकती है। अगर उनकी संख्या बहुत ज्यादा बढ़ जाती है तो आप हस्तक्षेप करने पर विचार कर सकते हैं, लेकिन उससे पहले हमेशा अपने स्थानीय लाइसेंस प्राप्त कृषि विज्ञानी की सलाह लें। बाजार में जैविक के साथ-साथ रासायनिक समाधान भी मौजूद हैं, जिन्हें हमेशा गैप के मानकों और स्थानीय लाइसेंस प्राप्त कृषि विज्ञानी की देख-रेख में प्रयोग किया जाना चाहिए।

लिरिओमाइज़ा

लिरिओमाइज़ा ब्रयोनी, बैंगन के सबसे बड़े दुश्मनों में से एक है। यह दिखने में किसी छोटी मक्खी जैसा लगता है, हालाँकि, इस कीड़े के लार्वा बैंगन की पत्तियों पर हमला करते हैं, और जिसकी वजह से सफेद स्टो और छेद हो जाते हैं। आखिरकार, पौधा प्रकाश संश्लेषण न कर पाने के कारण अपनी पत्तियां गिरा देता है। इसके अलावा, लार्वा द्वारा बनाये गए छेद के कारण, हानिकारक सूक्ष्मजीवों के संक्रमण का खतरा होता है।

उनकी आबादी पर हर समय नज़र रखना अच्छी तकनीक हो सकती है। अगर उनकी संख्या बहुत ज्यादा बढ़ जाती है तो आप हस्तक्षेप करने पर विचार कर सकते हैं, लेकिन उससे पहले हमेशा अपने स्थानीय लाइसेंस प्राप्त कृषि विज्ञानी की सलाह लें। बाजार में जैविक के साथ-साथ रासायनिक समाधान भी मौजूद हैं, जिन्हें हमेशा गैप के मानकों और स्थानीय लाइसेंस प्राप्त कृषि विज्ञानी की देख-रेख में प्रयोग किया जाना चाहिए।

बैंगन की बीमारियां

वर्टिसिलियम डहेलिया

वर्टिसिलियम डहेलिया एक गंभीर फफूंदी रोगाणु है जो बैंगन पर हमला करता है, और उसकी वजह से पौधा मर जाता है। पत्तियों का धीरे-धीरे सूखना, और इसके बाद भूरा होना इसका पहला लक्षण है। संक्रमित पौधों में स्वस्थ पौधों की तुलना में धीमा विकास हो सकता है। बीमारी पर नियंत्रण उचित निवारक उपायों से शुरू होता है। इसमें शामिल हैं: अच्छे वायु संचार के लिए उचित छंटाई सहित, जंगली घास पर नियंत्रण और पौधों के बीच उचित दूरियां। पौधों के लिए उचित स्थिति (पोषक तत्व, पानी का स्तर, और धूप) भी उनकी प्रतिरक्षा क्षमता को बढ़ा सकती है। समस्या ज्यादा गंभीर होने पर, हमेशा किसी लाइसेंस प्राप्त कृषि विज्ञानी की देखरेख में अक्सर रासायनिक उपचार प्रयोग किया जाता है।

फाइटोफ्थोरा

फाइटोफ्थोरा (फाइटोफ्थोरा इन्फेस्टांस) एक गंभीर फफूंदी रोगाणु है जो बैंगन पर हमला करता है।

विशेष रूप से ठंडी रातों के बाद गर्म दिन होने पर, उच्च आर्द्रता वाले दिनों के दौरान, मुख्य रूप से पत्तियों पर इसके लक्षण दिखाई देते हैं। जब हमारा पौधा फाइटोफ्थोरा से संक्रमित होता है तो हमें सफेद, पीले या ग्रे धब्बे दिखाई दे सकते हैं जो समय के साथ भूरे रंग के हो जाते हैं।

बैंगन की कटाई, उपज और भंडारण

ज्यादातर बैंगन रोपाई के 60 से 80 दिनों के बाद पूरी तरह तैयार हो जाते हैं। एक सामान्य नियम के अनुसार, किसान बीज भूरे होने से पहले बैंगन की कटाई करते हैं।

बैंगनों को 1 से ज्यादा कटाई सत्रों में हाथ से काटा जाता है। संयुक्त राज्य के बड़े व्यावसायिक खेतों में, किसान एक ही खेत में 3-4 हफ्ते तक प्रति सप्ताह 1 बार कटाई करते हैं। सालों के अभ्यास के बाद व्यावसायिक किसान हर स्वस्थ पौधे से 12 से 15 पूरे आकार के बैंगन पा सकते हैं, लेकिन यह काटी गयी फसल की किस्म और मनचाहे आकार पर भी निर्भर करता है।

सालों के अभ्यास के बाद प्रति हेक्टेयर 25 से 40 टन की फसल अच्छी मानी जाती है। ऐसे भी मामले हैं जिनमें किसानों ने प्रति हेक्टेयर 60 टन या उससे भी अधिक फसल पायी है। जाहिर तौर पर, ऐसी उच्च पैदावार केवल कुछ निश्चित परिस्थितियों (व्यापक खेती और कई सालों का अनुभव) में पायी जा सकती है।

इसके बाद बैंगन को ठंडी जगह भेज दिया जाता है लेकिन 10 °C ( 50 °F) तापमान वाले बेहद ठंड भंडारण क्षेत्रों में नहीं, ताकि उनका वजन कम होने से बचा जा सके।

क्या आपके पास बैंगन उगाने का अनुभव है? कृपया नीचे कमेंट में हमें अपने अनुभवों, विधियों और अभ्यासों के बारे में बताएं। जल्द ही हमारे कृषि विशेषज्ञ आपके द्वारा जोड़ी गयी सभी सामग्रियों की समीक्षा करेंगे। स्वीकृत होने के बाद, इसे Wikifarmer.com पर डाल दिया जाएगा और इसके बाद यह दुनिया भर के हजारों नए और अनुभवी किसानों को प्रभावित करेगा।

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