टिकाऊ कृषि (Sustainable Agriculture) क्या है?

टिकाऊ कृषि (Sustainable Agriculture) क्या है?

टिकाऊ कृषि एक दर्शन और पद्धतियों का एक सेट है जो मिल कर तीन अलग-अलग शर्तों को पूरा करती हैं:

  • पर्यावरण का सम्मान करना और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना
  • वर्तमान में किसानों के लिए एक उचित और पर्याप्त आय सुनिश्चित करना
  • कृषि पर गुज़ारा करने और भविष्य में भी उचित और पर्याप्त आय प्राप्त करने के लिए अगली पीढ़ियों की क्षमता से समझौता नहीं करना।

टिकाऊ कृषि के हजारों उदाहरण और विभिन्न पहलू हैं। एक सामान्य दर्शन के रूप में, टिकाऊ कृषि को अपनाने का मतलब है कि आप बिना पर्यावरण (मिट्टी, हवा, पानी) को प्रदूषित करे, और बिना किसी भी प्राकृतिक संसाधन को समाप्त किए और अपने कार्यों से पारिस्थितिकी तंत्र और जैव विविधता को बिना बाधित किए, किसी विशिष्ट फसल में पर्याप्त उपज का उत्पादन कर सकते हैं। आने वाले वर्षों के लिए स्वस्थ मृदा बनाना, रीसाइक्ल करना, सभी प्रकार के कूड़ा करकट को कम से कम करना, और जल संसाधनों के उपयोग को युक्तिसंगत बनाना भी टिकाऊ कृषि के सिद्धांत हैं।

उदाहरण: परिणामों को जाने बिना व्यापक स्पेक्ट्रम वाले वनस्पति नाशक का छिड़काव करना टिकाऊ कृषि के अनुकूल तरीका नहीं है क्योंकि इस में आप पौधों और कीड़ों की विभिन्न प्रजातियों को तुरंत मार देते हैं। साथ ही, हो सकता है कि उनमें से अधिकतर आपकी फसल के लिए खतरनाक न हों। दूसरी ओर, यह पाया गया है कि फसल चक्रण से मृदा में सुधार होता है, जंगली घास दब जाती है और जंगली घास की संख्या में कमी आती है। इस प्रकार, फसल चक्रण एक ऐसी विधि है जिसका लक्ष्य पिछली विधि (व्यापक स्पेक्ट्रम वाले वनस्पति नाशक का छिड़काव करना) के समान ही परिणाम प्राप्त करना है लेकिन यह टिकाऊ कृषि के साथ संगत है क्योंकि यह विधि पर्यावरण का सम्मान करती है और जैव विविधता को बढ़ावा देती है।

टिकाऊ कृषि को स्थापित करने के लिए सबसे बड़ा निवारक क्या है?

टिकाऊ कृषि को स्थापित करने में सबसे बड़ी बाधा शिक्षा की कमी है, और दूसरी सबसे बड़ी बाधा किसानों के पास पूंजी की कमी है। एक तरफ तो शायद किसानों को टिकाऊ कृषि को न अपनाने के परिणामों का पता नहीं है, इसलिए वे पुराने पारंपरिक तरीकों का उपयोग करते रहते हैं जो प्राकृतिक संसाधनों को दूषित करते हैं और पर्यावरण को प्रदूषित करते हैं। वहीं दूसरी ओर, हो सकता है कि कुछ अन्य किसान पूंजी की कमी के कारण टिकाऊ कृषि पद्धतियों को लागू करने में सक्षम न हों। टिकाऊ कृषि पद्धतियों को स्थापित करने के लिए हजारों छोटे-छोटे कदमों को लेने की आवश्यकता होती है जो सभी मिलकर एक किसान को 3 -4 वर्षों में अगले स्तर पर ले जाते हैं। हालाँकि, कुछ किसान इतने लंबे समय तक इंतजार नहीं कर सकते और वे पूरी तरह से इस साल की आय पर निर्भर होते हैं।

उदाहरण के लिए, जब एक किसान देखता है कि उसकी फसल के अंदर एक खतरनाक जंगली घास उग आई और यह पौधों के साथ कड़ा मुकाबला कर रही है, तो उस साल की फसल को बचाने के लिए टिकाऊ कृषि पद्धतियों के माध्यम से जंगली घास को धीरे-धीरे समाप्त करने के लिए एक रणनीति तैयार करने के बजाय एक व्यापक स्पेक्ट्रम वाले वनस्पति नाशक का छिड़काव करना बहुत आसान होता है। टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने वाले किसानों को प्रशिक्षण देने, प्रोत्साहित करने और उत्पादन को सब्सिडी देने में निवेश करने के लिए एक यथार्थवादी योजना बनाने के लिए सरकारें, संस्थान और नीति निर्माता ज़िम्मेदार होते हैं। आम जनता भी उपभोक्ता व्यवहार को स्थानांतरित करके और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को लागू करने वाले उत्पादकों को स्पष्ट रूप से प्राथमिकता देकर टिकाऊ कृषि पद्धतियों में सहायता कर सकती है।

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