चावल के कीड़े और रोग

हर साल, एक तिहाई से भी ज्यादा चावल की फसल कीड़ों और बीमरियों की वजह से खराब हो जाती है। अपने फसल के दुश्मनों को जानना और उनका सामना करने के लिए पर्यावरण के अनुकूल रवैया अपनाना बहुत जरूरी है। हम चावल के कीड़ों और रोगों के उचित नियंत्रण के लिए किसी स्थानीय लाइसेंस प्राप्त पेशेवर से परामर्श ले सकते हैं। सबसे सामान्य चावल के कीड़े और रोग नीचे सूचीबद्ध हैं।

कीड़े

  • प्लांटहॉपर और लीफहॉपर; प्लांटहॉपर (डेल्फेसीडी) अक्सर चावल के तने पर हमला करते हैं। इसके विपरीत, लीफहॉपर (सिकाडेलीडाय) पौधों के ऊपरी हिस्सों पर हमला करते हैं। इनसे ग्रस्त पौधों का रंग गहरे भूरे रंग का हो जाता है, जैसे मानो वो जल गए हों।
  • डेफोलिएटर; बहुत सारे कीड़े (लेपिडोप्टेरा, ऑर्थोप्टोरा, और कोलॉप्टेरा), अपना पेट भरने के लिए चावल की पत्तियों पर जाते हैं।
  • अनाज पर हमला करने वाले कीड़े; इबलस पुगनेक्स, इसे राइस स्टिंक बग के रूप में जाना जाता है और ये अपरिपक्व पौधों पर हमला करते हैं और उनका अनाज खाते हैं।

रोग

  • बैक्टीरियल ब्लाइट; यह बीमारी ज़ैंथोमोनस ओरिज़ाई की वजह से होती है। यह ज्यादा आर्द्रता वाले, समशीतोष्ण और उष्णकटिबंधीय जलवायु दोनों में होती है। इसकी वजह से मुख्य रूप से पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं।
  • बैक्टीरियल लीफ स्ट्रीक; यह बीमारी भी ज़ैंथोमोनस ओरिज़ाई की वजह से होती है। यह ज्यादा आर्द्रता वाले क्षेत्रों में अस्वस्थ और चोटिल पौधों में पायी जा सकती है। इसकी वजह से पत्तियां सूखने लगती हैं और भूरी हो जाती हैं।
  • भूरे धब्बे; यह एक फफूंदी रोग है जो मुख्य रूप से पत्तियों और पुष्पगुच्छ को प्रभावित करता है। पूरी पत्ती के ऊपर बड़े भूरे धब्बे फैलने शुरू हो जाते हैं। यह सबसे नुकसानदायक चावल के रोगों में से एक है और ज्यादा आर्द्रता वाले खेतों में अक्सर दिखाई देता है ।

इन कीड़ों और बीमारियों को नियंत्रित करने का सबसे अच्छा तरीका है, रोकथाम। चावल के किसानों को निम्नलिखित उपायों पर विचार करना चाहिए:

  • मौसमों के बीच खेत और चावल के खेतों में प्रयोग किये जाने वाले उपकरणों की उचित सफाई करना जरूरी है।
  • प्रमाणित बीजों का उपयोग।
  • उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग से बचना।
  • कई मामलों में, बीज बोने के 40 दिनों के भीतर कीटनाशक डालने की अनुमति नहीं होती है (अपने स्थानीय लाइसेंस प्राप्त कृषि विज्ञानी से पूछें)।
  • अनाज का उचित भंडारण। कई मामलों में, अनाज 13-14% नमी वाले कंटेनरों में रखे जाते हैं।

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