चावल की कटाई, प्रति हेक्टेयर उपज और भंडारण

Rice Farming

समय पर फसल काटना; यह क्यों मायने रखता है?

चावल का जैविक चक्र (बुवाई से फसल तक का दिन) 95 दिनों (बहुत जल्दी पकने वाली किस्में) से लेकर लगभग 250 दिनों (बहुत देर से पकने वाली किस्में) तक होता है। मध्यम समय में पकने वाली किस्मों की कटाई, बुवाई के 120-150 दिन बाद की जा सकती है। जब अनाज पीले रंग का और कड़ा होना शुरू हो जाता है तो हम इसकी कटाई के लिए तैयार होते हैं।

अनाज की गुणवत्ता और पैदावार बढ़ाने के लिए समय पर चावल की फसल काटना बहुत महत्वपूर्ण है। अगर हम बहुत जल्दी फसल काट देते हैं, तो एकत्रित अनाज कच्चा होगा और परिणामस्वरूप चावल के छिलके और भूसे को अलग करने में परेशानी होगी और वे आसानी से टूट जाएंगे। दूसरी ओर, जब फसलों को देर से काटा जाता है तब दाने पुष्पगुच्छ से गिर सकते हैं और किसान को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। एक सामान्य नियम के अनुसार, फसल 80-85% प्रतिशत तक पकने पर या सुनहरे पीले रंग का होने पर इसकी कटाई शुरू की जा सकती है।

फसल हाथ से या मशीन से काटी जा सकती है। हाथ से फसल काटने पर, मजदूर तेज चाकू का इस्तेमाल करके चावल के खेत से पौधे काटते हैं। इसके बाद, वो उन्हें सावधानीपूर्वक साफ करते हैं और खराब पौधों को अलग करते हैं। यांत्रिक कटाई मशीन के प्रयोग से की जा सकती है जो कटाई, भूसी निकालने और सफाई जैसी सभी गतिविधियों को एक साथ मिलाती है।

कटाई के बाद प्रबंधन

कटाई के बाद, चावल के बीजों को आमतौर पर कोठला में रखने की जरूरत पड़ती है और कृत्रिम रूप से सुखाया जाता है, ताकि बीज की नमी 13-14% तक कम हो सके।

चावल सुखाने की प्रक्रिया

अनाज की नमी को कम करने के लिए सुखाना एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। फसल काटने के बाद, अनाज में आमतौर पर लगभग 25% नमी होती है। अगर हम उन्हें ऐसे ही छोड़ देते हैं, तो इसकी वजह से अनाज का रंग उतर सकता है और कीड़े इसपर हमला कर सकते हैं। इसलिए, ज्यादातर मामलों में, अनाज के भंडारण से पहले, किसान अनाज को सूखा देते हैं। सुखाने के दो तरीके हैं। पारंपरिक और यांत्रिक तरीका। ज्यादातर मामलों में, फसल काटने के बाद 24 घंटों के भीतर अनाज को सूखना जरूरी होता है।

पारंपरिक तरीके से सुखाना 

इसकी कम और लगभग शून्य लागत के कारण, बहुत सारे देशों में सुखाने के पारंपरिक तरीके को पसंद और प्रयोग किया जाता है। हम सूरज की रोशनी चावल के दाने सूखा सकते हैं। मजदूर अनाज सूखाने के लिए उन्हें दरियों या पगडंडियों पर फैला देते हैं।

यांत्रिक तरीके से सुखाना

इस विधि में गर्म हवा की मदद से अनाज से पानी सुखाया जाता है। यह अलग-अलग तरह के ड्रायर से किया जा सकता है।

प्रति हेक्टेयर चावल (बीज) की औसत उपज 3-6 टन होती है। ऑस्ट्रेलिया और मिस्र जैसे कुछ देशों में, ये उपज बढ़कर प्रति हेक्टेयर 10-12 टन या इससे ज्यादा भी हो सकती है। (1 टन = 1000 किलो = 2200 पाउंड और 1 हेक्टेयर = 2,47 एकड़ = 10.000 वर्ग मीटर)। जाहिर तौर पर, कई वर्षों के अभ्यास के बाद अनुभवी किसान ऐसी बड़ी पैदावार पा सकते हैं।

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Wikifarmer की संपादकीय टीम
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